कानपुर अवैध किडनी कांड : पुलिस ने अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर। उत्तर प्रदेश के रावतपुर क्षेत्र में प्राइवेट अस्पतालों में अवैध किडनी खरीद-फरोख्त के मामले में पुलिस ने अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि चार अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश जारी है। पुलिस उपायुक्त पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने पत्रकारों को बताया कि जांच के दौरान एक विदेशी महिला की किडनी ट्रांसप्लांट और किडनी प्रत्यारोपण के दौरान एक महिला की मृत्यु से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं, जिनकी विस्तृत रिपोर्ट निकाली जा रही है। 

उन्होने बताया कि इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि अमित,अली,रोहित और अफजल की तलाश की जा रही है। पुलिस की टीमें इस सिलसिले में अलग अलग जिलों में दबिश दे रही है। इस मामले में अहूजा अस्पताल के अलावा "मेडी लाइफ" अस्पताल का नाम भी सामने आया है। पुलिस संबंधित डॉक्टर से पूछताछ कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। 

गौरतलब है कि कानपुर की रावतपुर पुलिस ने पिछली 31 मार्च को अवैध मानव अंग प्रत्यारोपण से जुड़े एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए डाक्टर दंपति समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें पांच डॉक्टर और एक एम्बुलेंस चालक शामिल है। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ अस्पतालों में गरीब और मजबूर लोगों की किडनी निकालकर उन्हें ऊंची कीमत पर बेचा जा रहा है।

इस सूचना पर सीएमओ टीम, डीसीपी वेस्ट की सर्विलांस टीम तथा थाना रावतपुर व कल्याणपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने तीन अस्पतालों आहूजा अस्पताल, प्रिया अस्पताल और मिड लाइफ अस्पताल पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान कुल चार अस्पताल संचालकों समेत छह लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें डॉ. सुरजीत सिंह अहूजा (54), उनकी पत्नी डॉ. प्रीति अहूजा (50), डॉ. राजेश कुमार (44), डॉ. राम प्रकाश (40), डॉ. नरेंद्र सिंह (35) और एम्बुलेंस चालक शिवम अग्रवाल (32) शामिल थे।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाइयां और लगभग 1.75 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों में अब तक लगभग 40 से 50 किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका है जिसमें एक दक्षिण अफ्रीकी नागरिक भी शामिल है।

सामान्य तौर पर किडनी ट्रांसप्लांट मरीज का निकट रिश्तेदार ही कर सकता है और इसके लिये भी एक प्रक्रिया के तहत अनुमति लेनी पड़ती है। पुलिस किडनी प्रत्यारोपण में लिप्त पूरे नेटवर्क की गहनता से जांच कर रही है, जिससे इसमें संलिप्त अन्य व्यक्तियों एवं संस्थानों की भी पहचान की जा सके।

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