मंत्री एके शर्मा बोले- यूपी में बायोगैस प्लांट्स का हो रहा विस्तार, जल्द दिखेगा असर

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
On

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) संयंत्रों की स्थापना की दिशा में कारगर कदम उठा रही है और आने वाले समय में इसका व्यापक असर दिखाई देगा।

मंत्री एके शर्मा ने सोमवार को एक न्यूज एजेंसी से कहा कि लखनऊ के अलावा कानपुर, गोरखपुर, सहारनपुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ नगर निगम सीबीजी की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। वाराणसी और प्रयागराज नगर निगमों में सीबीजी प्लांट स्थापित होकर संचालित भी हो रहे हैं। इन प्लांट्स से प्रतिदिन लगभग पांच से 10 टन सीबीजी गैस का उत्पादन हो रहा है। 

इसके लिए जैविक कचरा, नगर ठोस अपशिष्ट और गोबर जैसे फीडस्टॉक का उपयोग किया जा रहा है। वाराणसी प्लांट की क्षमता 90 टन प्रतिदिन है, जिसमें ठोस कचरे के साथ कृषि अपशिष्ट, प्रेसमड और गोबर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं प्रयागराज प्लांट की क्षमता 200 टीपीडी है, जो पीपीपी मॉडल के तहत संचालित हो रहा है और नगर क्षेत्र से निकलने वाले कचरे का उपयोग कर रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य में सीबीजी प्लांट्स की स्थापना मुख्य रूप से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल या सार्वजनिक उपक्रमों के सहयोग से की जा रही है। नगर निगम परियोजना स्थल पर भूमि और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, जबकि निजी डेवलपर 25 से 30 वर्षों तक निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाते हैं।

मंत्री शर्मा ने बताया कि अलीगढ़ नगर निगम में भी स्वच्छ भारत मिशन के तहत मार्च 2026 में सीबीजी प्लांट को मंजूरी दी गई है। इस प्लांट की संभावित उत्पादन क्षमता 60 से 87 टीपीडी निर्धारित की गई है। उत्तर प्रदेश में सीबीजी प्लांट्स को लेकर नगर निगम स्तर पर तेज़ी से काम चल रहा है। लखनऊ, कानपुर, सहारनपुर, गोरखपुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ में प्रस्तावित परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में हैं।

परियोजनाओं की स्थिति और क्षमता को लेकर शर्मा ने बताया कि लखनऊ में एवर-एनवायरो रिसोर्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 300 टीपीडी इनपुट क्षमता का प्लांट स्थापित किया जा रहा है। अनुमानित गैस उत्पादन 10-15 टीपीडी है। परियोजना निर्माणाधीन है। इसी तरह कानपुर में सी यूजीएल के माध्यम से 550 टीपीडी क्षमता वाला प्लांट विकसित हो रहा है, जिससे 15-20 टीपीडी सीबीजी उत्पादन का लक्ष्य है। यह भी निर्माणाधीन है। 

उन्होंने बताया कि सहारनपुर में बीपीसीएल के साथ कंसेशन एग्रीमेंट साइन हो चुका है। 150 टीपीडी इनपुट क्षमता से 8-10 टीडीपी गैस उत्पादन प्रस्तावित है।गोरखपुर में आईओसीएल के साथ एमओयू साइन किया गया है। 200 टीपीडी क्षमता वाला प्लांट विकास चरण में है और 10-12 टीपीडी उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। गाजियाबाद में 300 टीपीडी क्षमता वाले प्लांट के लिए आईजीएल के साथ पायलट प्रोजेक्ट पर चर्चा पूरी हो चुकी है। सफल संचालन के बाद क्षमता बढ़ाने की योजना है। अलीगढ़ में 256 टीपीडी क्षमता वाला प्लांट एसबीएम 2.0 के तहत स्वीकृत हुआ है। 

फिलहाल रेप तैयार किया जा रहा है और 10-15 टीडीपी उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है। इन सभी परियोजनाओं की कुल इनपुट क्षमता 1756 टीपीडी है, जबकि कुल संभावित सीबीजी उत्पादन 60-87 टीडीपी के बीच आंका गया है। शहरी विकास विभाग इन परियोजनाओं में निजी निवेशकों के साथ समन्वय स्थापित कर रहा है। साथ ही बीपीसीएल, आईओसीएल, आईजीएल और सीयूजीएल जैसी गैस कंपनियों को भी अपने खर्च पर सीबीजी प्लांट स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। 

नगर निगम परियोजनाओं के लिए भूमि और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निजी या पीपीपी मॉडल के तहत तय की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन पहलों से राज्य में ठोस कचरा प्रबंधन को मजबूती मिलने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को भी नई दिशा मिलेगी। 

संबंधित समाचार