बरेली: फरीदपुर तहसील के भवनों में हुए भ्रष्टाचार की खुलेंगी परतें
अमृत विचार, बरेली। तहसील फरीदपुर के नवनिर्मित अनावासीय भवनों एवं समस्त निर्माण कार्यों की जांच के लिये कमेटी गठित कर दी गई है। इससे निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता कर अपनी जेब भरने वालों की पोल खुलकर सामने आयेगी। नवनिर्मित भवनों की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतें लखनऊ तक पहुंची हैं। शासन स्तर से …
अमृत विचार, बरेली। तहसील फरीदपुर के नवनिर्मित अनावासीय भवनों एवं समस्त निर्माण कार्यों की जांच के लिये कमेटी गठित कर दी गई है। इससे निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता कर अपनी जेब भरने वालों की पोल खुलकर सामने आयेगी। नवनिर्मित भवनों की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतें लखनऊ तक पहुंची हैं। शासन स्तर से आईआईटी रुड़की की टीम से नवनिर्मित भवनों की तकनीकी जांच कराई जा रही है। अब जिलाधिकारी नितीश कुमार निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से लेकर आगणन के सापेक्ष आवंटित धनराशि में से कितनी धनराशि खर्च की गयी इसकी जांच करा रहे हैं।
जांच समिति के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार पांडेय अध्यक्ष और प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और एसडीएम फरीदपुर सदस्य बनाये गये हैं। प्रशासनिक अधिकारी कलेक्ट्रेट राजेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी के निर्देश पर कमेटी गठित होने के आदेश जारी किये।
इसमें समिति तहसील के नवनिर्मित भवनों, समस्त कार्यों की गुणवत्ता का परीक्षण व जांच करेगी। जांच समिति को निर्देश दिये गए हैं कि समस्त कर्मियों का चिह्नांकन करते हुये अपनी संयुक्त जांच आख्या स्पष्ट करते हुये 10 दिन में प्रस्तुत करेगी। जांच कराने के संबंध में परियोजना अभियंता उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड (पूर्ववर्ती पैकफेड) निर्माण प्रखंड बरेली प्रथम को भी सूचना दी गयी है। तहसील के सभी भवनों का निर्माण 3.40 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है।
बता दें कि तहसील फरीदपुर के नवनिर्मित भवनों की गुणवत्ता खराब होने के संबंध में फरीदपुर विधायक श्याम बिहारी लाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी। इसके बाद शासन ने जिलाधिकारी को भवनों की तकनीकी जांच आईआईटी रुड़की से कराने के निर्देश दिये थे।
जिलाधिकारी के पत्र पर जांच करने के लिये आईआईटी रुड़की ने सहमति जताई थी। वहीं, एसडीएम और तहसीलदार की जांच में पहले ही तहसीन के भवनों के निर्माण में भ्रष्टाचार होने का मामला सामने आ चुका है। तत्कालीन एसडीएम विशु राजा ने अपनी जांच रिपोर्ट में गंभीर गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए निर्माण को घटिया बताया था।
