Moradabaad : जागरूकता बढ़ाकर लोगों को करें स्वगणना के लिए प्रेरित

Amrit Vichar Network
Published By Pradeep Kumar
On

जिलाधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म व ह्वाट्सएप स्टेटस पर स्वगणना की फोटो अपलोड करने की अपील की

मुरादाबाद, अमृत विचार। जनगणना के अन्तर्गत पहले चरण की शुरुआत में 21 मई तक चल रही स्वगणना के प्रति जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने लोगों को जागरूक कर प्रेरित करने के लिए कहा है। उन्होंने स्वयं के साथ दूसरों को भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट कर और ह्वाट्सएप स्टेटस पर स्वगणना की फोटो अपलोड करने की अपील की है।

जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट में ऑनलाइन विवरण भरकर स्वगणना की शुरूआत की थी। इसके बाद से वह जन सामान्य जागरूक करने के अभियान में जुटे हैं, जिससे गाइडलाइंस के अनुसार समय से जनगणना में सही व पारदर्शी तरीके से डेटा का डिजिटलाइजेशन हो सके। जिलाधिकारी स्वयं भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सक्रिय हैं। शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी उन्होंने इसे प्राथमिकता देने का आह्वान किया है। वह स्वयं इसकी मॉनीटरिंग जिला जनगणना प्रमुख के रूप में कर रहे हैं। इसका उद्देश्य लोगों को जनगणना में रुचि लेकर इसे राष्ट्रीय दायित्व मानकर सहभागिता सुनिश्चित कराना है।

जन आंदोलन से घटेगा प्लास्टिक कचरा
,स्मार्टफोन के दौर में सात से 10 सेकंड तक सिमट चुकी लोगों की एकाग्रता को वापस लाने और पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए जिलाधिकारी ने नई पहल की है। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने ''''एक पुष्प, एक पुस्तक'''' और ''''सब पढ़ें, आगे बढ़ें'''' अभियान को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए अधिकारियों से भी कहा है। उन्होंने सरकारी कार्यालयों में महंगे बुके पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। उनका कहना है कि सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में आयोजित कार्यक्रमों में अतिथियों के स्वागत में 200 से 1500 रुपये तक के महंगे और प्लास्टिक युक्त बुके (पुष्पगुच्छ) नहीं दिए जाएंगे।

पुस्तकें ''पॉपकॉर्न माइंड'' से निपटने की कारगर दवा
जिलाधिकारी का मानना है कि आज के डिजिटल युग में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग ने आम आदमी के मस्तिष्क को ''''पॉपकॉर्न माइंड'''' में तब्दील कर दिया है। लोगों में स्थिरता का अभाव हो गया है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता (कंसंट्रेशन) घटकर महज सात, आठ या 10 सेकंड से लेकर अधिकतम एक मिनट तक रह गई है। इस प्रवृत्ति को सुधारने और इस गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या से निपटने के लिए पुस्तकों का अध्ययन बेहद जरूरी है। जब कोई व्यक्ति किताब पढ़ता है, तो उसकी एकाग्रता स्वतः बढ़ने लगती है।

संबंधित समाचार