Bareilly: फोटोकॉपी के दम पर बदल दिया था सरकारी जमीन का भूगोल

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
On

बरेली/नवाबगंज। नवाबगंज तहसील के ज्योरा मकरंदपुर में हुए भू-घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद अब तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कैसे सिस्टम के भीतर बैठे लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने का खेल रचा और राजस्व विभाग के ही कुछ जिम्मेदारों ने फाइलों में लगे असली कागजों की जगह महज फोटोकॉपी के दम पर करोड़ों की सरकारी जमीन का पूरा भूगोल ही बदल कर करोड़ों की सरकारी जमीन भूमाफियाओं के नाम कर दी।

यह मामला वर्ष 2013 के पट्टों से शुरू हुआ था, जो तकनीकी खामियों के कारण काफी पहले ही निरस्त किए जा चुके थे। इसके बावजूद, अभिलेखों में हेराफेरी कर इस बेशकीमती जमीन को सरकारी घोषित करने के बजाय भू-माफियों के पक्ष में बनाए रखा गया। जब शिकायतकर्ताओं ने मामला उठाया और जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच हुई तो सामने आया कि इस भू-घोटाले को अंजाम देने के लिए फोटोकॉपी का सहारा लिया गया। नियमानुसार किसी भी जमीन का राजस्व रिकॉर्ड में नाम चढ़ाना मूल दस्तावेजों के सत्यापन के बिना नहीं हो सकता। लेकिन इस मामले में धारा 38 के तहत प्रक्रिया अपनाते समय कानूनगो श्याम सुंदर गुप्ता ने बिना लेखपाल की अनिवार्य आख्या के ही फाइल को आगे बढ़ा दिया। इतना ही नहीं, तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह ने भी मूल दस्तावेजों को देखे बिना ही प्रकरण को एसडीएम न्यायिक के न्यायालय में भेज दिया। इसी कूटरचित प्रक्रिया के जरिए सरकारी जमीन को निजी पक्ष में दर्ज करा दिया गया।

कब्जेदारों को ''''स्टे'''' दिलाने के लिए तहसील प्रशासन ने दी ढील
लापरवाही का आलम यह था कि जब मामले ने तूल पकड़ा, तब भी तहसील की टीम ने कार्रवाई में जानबूझकर सुस्ती दिखाई। बीते दिनों शिकायत पर जब नायब तहसीलदार और पुलिस बल मौके पर पहुंचे, तो केवल औपचारिकता निभाने का काम किया गया। गन्ने की लहलहाती फसल को हाथ तक नहीं लगाया गया और कब्जेदारों को मौखिक रूप से ऐसी मोहलत दी गई, जिसका फायदा उठाकर वे तत्काल अपर आयुक्त (न्याय) की अदालत पहुंच गए और स्टे) हासिल कर लिया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह पूरी कवायद कब्जेदारों को राहत दिलाने के लिए तहसील प्रशासन की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी।

23 माह का संघर्ष, तब जाकर खुली फर्जीवाड़े की पोल
ज्योरा मकरंदपुर के इस भू-घोटाले को उजागर करने में गांव के ही दो जागरूक ग्रामीणों, सूरजपाल और लालाराम की मुख्य भूमिका रही। उन्होंने करीब 23 माह पूर्व तहसील दिवस में इस बेशकीमती सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, तहसील प्रशासन ने उस समय ठोस कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ताओं के नाम से ही आरोपी पक्ष पर मुकदमा दर्ज कराकर पल्ला झाड़ लिया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें लंबे समय तक प्रशासनिक उपेक्षा का सामना करना पड़ा, फिर भी हार नहीं मानी। डीएम ने संज्ञान लिया और इस बड़े भ्रष्टाचार का खेल उजागर हो गया।

संबंधित समाचार