नेपाल : उल्टे न पड़ जाएं बालेन के ये फैसले
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह एक साथ कई मोर्चों पर जूझते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसका असर उनके राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है। सत्ता संभालने के बाद उनका पहला बड़ा कदम सुकंबासी (बेघर व भूमिहीन) लोगों को बेदखल करना था। इससे नेपाल के करीब 15 लाख लोग नाराज़ हो गए और बालेन के खिलाफ सड़कों पर आ गए। नाराज़ लोगों में सर्वाधिक वह परिवार भी थे, जिसके युवा अमेरिका में रह रहे हैं। चुनाव के समय अमेरिका में रह रहे नेपाली युवाओं ने अपने परिजनों को फोन कर बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को वोट देने की अपील की थी।
नेपाल के ऐसे लाखों परिवार अब निराश हैं, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बालेन सरकार के बुलडोजर पर ब्रेक लगाने का आदेश दिए हैं, लेकिन यह आदेश जबतक आया तब तक बालेन का बुलडोजर लाखों परिवारों पर तबाही की इबारत लिख चुका था। हैरत है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद लोगों को यह यकीन नहीं हो पा रहा कि सरकार उनके पुनर्वास के बारे में कुछ सोचेगी? प्रभावित लोगों का कहना है कि सरकार ने उनके लिए किसी भी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है, जिससे वे भारी चिंता और असमंजस की स्थिति में हैं।
लोगों का मानना है कि यदि सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता और रणनीति के साथ हल नहीं किया, तो यह आंदोलन और उग्र हो सकता है तथा देश के अन्य हिस्सों में फैलने की आशंका है। इस बीच नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए सरकार को निर्देश दिया है कि सुकंबासी बस्तियों को फिलहाल न हटाया जाए और वर्तमान स्थिति को यथावत रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सुकंबासी लोगों के लिए राहत भरा है, लेकिन लोगों की चिंता यह है कि सरकार इस आदेश को निष्प्रभावी करने के लिए कोई और तरकीब न ढूंढ ले।
न्यायाधीश कुमार रेग्मी और न्यायाधीश नित्यानंद पांडे की दो सदस्यीय पीठ ने गोपाल रनपहेली समेत 11 लोगों द्वारा दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक संबंधित अधिकारी किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई से परहेज करें। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि प्रभावित लोगों के लिए आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और खाद्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अदालत ने इस मामले को अगली सुनवाई तक विचाराधीन रखते हुए मानवाधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
बालेन सरकार के काठमांडू का मेयर रहते यह कार्रवाई उनकी प्राथमिकता में थी लेकिन तब उनका कार्य क्षेत्र सीमित था, प्रधानमंत्री बनने के बाद वे सुंदरीकरण के नाम पर पूरे नेपाल में सुकंबासियों को उजाड़ने का अभियान शुरू कर दिए हैं।
नेपाल के अन्य राजनीतिक दल मानते हैं कि शहरों को सुंदर और व्यवस्थित बनाने के लिए यह जरूरी था, लेकिन सरकार की प्राथमिकता में वह होना चाहिए था, जनता ने जिसके लिए उन्हें चुना है। नेपाल में बेरोज़गारी बड़ा मुद्दा है, लेकिन यह भी सच है कि नेपाल में ऐसी कोई फैक्ट्री नहीं लगाई जा सकती, जिससे रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त हो। इसके लिए उन्हें नेपाल के टूरिस्ट उद्योग को मजबूत करने पर जोर देना चाहिए। नेपाल में सबसे अधिक भारतीयों का आना-जाना होता है, लेकिन नेपाल सरकार के कस्टम ड्यूटी में बदलाव के कारण भारतीयों का नेपाल आना-जाना प्रभावित हो सकता है।
