मधुमिता शुक्ला हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट ने माफ की दोषी रोहित चतुर्वेदी की सजा, कहा- ध्यान सुधार पर होना चाहिए

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Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 2003 के बहुचर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के एक दोषी की समय पूर्व रिहाई के अनुरोध वाली याचिका को शुक्रवार को विचारार्थ स्वीकार कर लिया और कहा कि ध्यान सुधार पर होना चाहिए, न कि दंड देने पर। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने गृह मंत्रालय के नौ जुलाई, 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें दोषी रोहित चतुर्वेदी की समय पूर्व रिहाई के लिए उत्तराखंड सरकार की सिफारिश को खारिज कर दिया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने गौर किया कि चतुर्वेदी ने बिना किसी छूट के 22 साल जेल में बिताए हैं। न्यायालय ने टिप्पणी की, ''अपराध एक बात है, सुधार दूसरी। ध्यान सुधार पर होना चाहिए, न कि दंड देने पर।'' उच्चतम न्यायालय ने कहा कि चतुर्वेदी पहले से ही जमानत पर बाहर है और उसे आत्मसमर्पण करने की आवश्यकता नहीं है। कवयित्री मधुमिता शुक्ला की नौ मई, 2003 को लखनऊ की पेपर मिल कॉलोनी में हत्या कर दी गई थी। उस समय वह गर्भवती थीं।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को सितंबर 2003 में कवयित्री की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था, जिनके साथ कथित तौर पर उनका संबंध था। इसके बाद, शुक्ला की हत्या की साजिश के सिलसिले में अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया। उत्तराखंड की एक निचली अदालत ने 24 अक्टूबर 2007 को अमरमणि त्रिपाठी, पूर्व मंत्री की पत्नी मधुमणि त्रिपाठी, रिश्तेदार रोहित चतुर्वेदी और सहयोगी संतोष कुमार राय को शुक्ला की हत्या का दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

नौतनवा से विधायक रहे अमरमणि त्रिपाठी उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार में और 2002 में बनी बसपा सरकार में भी मंत्री थे। वह समाजवादी पार्टी से भी जुड़े थे। मामले की जांच 17 जून 2003 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। उच्चतम न्यायालय ने आठ फरवरी 2007 को मुकदमे की सुनवाई उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड स्थानांतरित कर दी। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने 16 जुलाई 2012 को उनकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने 19 नवंबर 2013 को इस आदेश को बरकरार रखा।

उत्तर प्रदेश के कारागार विभाग ने 24 अगस्त 2023 को राज्य की 2018 की सजा माफी नीति और इस तथ्य का हवाला देते हुए कि सजा के 16 वर्ष पूरे हो चुके हैं, अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी की समय से पहले रिहाई का आदेश जारी किया। आपराधिक साजिश और हत्या के दोषी ठहराए गए चतुर्वेदी ने उत्तराखंड सरकार के समक्ष समय पूर्व रिहाई की अर्जी दाखिल की थी।

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