मुजफ्फरनगर में स्मार्ट बैरक, बरेली में कब
बरेली, अमृत विचार। इमरजेंसी के वक्त फोर्स रिजर्व रखने के उद्देश्य से प्रदेशभर के थानों में बैरक बनाई गई है। कुछ थानों की बैरक की हालत तो ठीक है और पुलिस कर्मी इनमें रुकते भी हैं लेकिन बरेली के कई थानों की बैरक का हाल इतने बुरे हैं कि पुलिस कर्मी किराये पर कमरा लेकर …
बरेली, अमृत विचार। इमरजेंसी के वक्त फोर्स रिजर्व रखने के उद्देश्य से प्रदेशभर के थानों में बैरक बनाई गई है। कुछ थानों की बैरक की हालत तो ठीक है और पुलिस कर्मी इनमें रुकते भी हैं लेकिन बरेली के कई थानों की बैरक का हाल इतने बुरे हैं कि पुलिस कर्मी किराये पर कमरा लेकर रहने को मजबूर हाो जाते हैं। जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक के आला पुलिस अधिकारी इससे भली-भांति परिचित भी हैं।
बैरक को स्मार्ट बनाने की बातें भी कही जाती रही हैं। इतना ही नहीं मुजफ्फरनगर जिले के एक थाने की बैरक की वीडियो तस्वीरें तो खुद यूपी पुलिस ने ट्विटर पर शेयर करते हुए उसे स्मार्ट बैरक करार दिया था। साथ ही यह भी दावा किया गया था कि इसी तरह प्रदेश के हर थाने की बैरक को स्मार्ट बनाया जाएगा लेकिन बरेली के थानों की बैरकों की बदहाली सरकारी व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रही है। यहां के पुलिस कर्मियों को अब भी स्मार्ट बैरक का इंतजार है।
बता दें कि मुजफ्फरनगर पुलिस लाइंस की बैरक के हालत काफी बदतर हुआ करते थे। अब इसकी सूरत पूरी तरह से बदल चुकी है। यूपी पुलिस इसे स्मार्ट बैरक करार देते हुए टि्वटर पर भी इस बैरक का वीडियो पोस्ट कर चुकी है। वहीं, शहर में सुभाष नगर थाने की बैरक की हालत काफी खराब है। न तो सर्दियों में हवा रोकने के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही गर्मी में राहत दिलाने के। खिड़कियों पर मकड़ी के जाले लगे रहते हैं। बैरक के सामने ही गाड़ियों का कबाड़ पड़ा रहता है। अंदर की हालत भी काफी खराब है।
बारादरी थाने की बैरक का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहां भी न तो ढंग की चारपाई है और न ही पुलिसकर्मियों के सामान रखने की कोई बेहतर व्यवस्था। बैरक की हालत खस्ता होने पर पुलिसकर्मी यहां ठहरना नहीं चाहते हैं। पुलिसकर्मी इसकी वजह से बाहर किराये पर कमरा लेकर रहते हैं। बैरक में रहने वाले पुलिसकर्मियों के लिए न तो बेहतर शौचालयों का इंतजाम है और न ही स्नानघर का। कैंट थाना की बैरक और वहां के शौचालय व स्नानघर की हालत ऐसी ही है। शहर हो या देहात अधिकांश थानों में तस्वीर लगभग एक जैसी ही नजर आती है।
हालांकि, जिस थाने की इमारत नई बनी है उसकी बैरक कुछ बेहतर हुई हैं। एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने जब बरेली में पदभार ग्रहण किया था तो सभी थानों का शनिवार व रविवार को निरीक्षण करना शुरू किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बैरक और शौचालयों को देखा था और थाना प्रभारियों को सुधार के निर्देश भी दिए थे लेकिन कुछ थानों को छोड़ दें तो हालात अब भी बदतर बने हुए हैं।
स्मार्ट बैरक की खासियत
मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन की जिस बैरक को स्मार्ट बैरक कहा जाता है उसकी कई खूबियां हैं। बैरक में सभी पुलिसकर्मियों के लिए अलग बेहतर बेड उपलब्ध है। बेड के नीचे भी सामान रखने की व्यवस्था की गई है। डबल स्टोरी अलमारी दी गई है जिसमें पुलिस कर्मी अपना सामान सुरक्षित रख सकते हैं। सभी बेड के पास अलग से चार्जिंग प्वाइंट दिए गए हैं। इसके अलावा खिड़कियां बेहतर बनाई गई हैं और पर्दे भी लगे हैं। इसके अलावा सर्दियों से बचाने के लिए रूम हीटर के भी इंतजाम किए गए हैं।
मुजफ्फरनगर की बैरक काफी अच्छी है। बरेली के कई थानों में बैरक की हालत काफी बेहतर है। कुछ थाने हैं जहां बैरक खराब हैं। इनमें सुधार के निर्देश दिए गए हैं। – रोहित सिंह सजवाण, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
