Uttrakhand: लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी पर सरकार से सवाल, हाईकोर्ट ने 16 जून तक मांगी प्रगति रिपोर्ट
विधि संवाददाता, नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार को लोकायुक्त की नियुक्ति के संबंध में पूर्व के आदेशों का पालन न करने के मामले में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूर्व में दिए गए अदालत के निर्देशों पर हुई प्रगति के बारे में भी पूछा। महाधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि नियुक्ति प्रक्रिया अब भी जारी है और उन्होंने यह स्वीकार करते हुए अतिरिक्त समय प्रदान करने का अनुरोध किया कि प्रक्रिया धीमी गति से आगे बढ़ रही है। पीठ ने सरकार को आधे घंटे के भीतर अदालत के आदेशों का पालन न करने का कारण बताने का आदेश दिया और साथ ही सर्च कमेटी की अगली बैठक का कार्यक्रम देने को भी कहा। राज्य सरकार ने एक संक्षिप्त स्थगन के बाद अदालत को बताया कि सर्च कमेटी की पहली बैठक संभवतः जून के पहले सप्ताह में होगी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 16 जून तय करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक सर्च कमेटी द्वारा लिए गए सभी निर्णय प्रस्तुत करें। पीठ ने इस बात पर नाराजगी जताई कि सरकार ने एक साल पहले समय देने का अनुरोध किया था, जिसके बावजूद अब तक कोई नियुक्ति नहीं हुई। अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार लगातार समय बढ़ाने का अनुरोध कर रही है। अदालत ने कोरम (सर्च कमेटी में सदस्यों की संख्या न्यूनतम से भी कम रहने) की कमी की वजह से बैठक नहीं हो पाने की दलील पर समिति की बैठक के लिए चार सप्ताह का समय बढ़ा दिया था। इससे पहले, राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए छह महीने का समय देने का अनुरोध किया था लेकिन अदालत ने केवल तीन महीने का समय दिया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि सरकार इस संस्था पर सालाना लगभग दो से तीन करोड़ रुपये खर्च करती है लेकिन आज तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की गयी।
जोन्स एस्टेट की भूमि के रिकॉर्ड देखने की अनुमति
नैनीताल: हाईकोर्ट ने भीमताल के प्रमुख जोन्स एस्टेट के भूमि रिकॉर्ड की जांच से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को राजस्व अभिलेखों के निरीक्षण की अनुमति दे दी है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने भीमताल निवासी पीटर स्मैटचेक की ओर से दायर जनहित याचिका पर बुधवार 13 मई को सुनवाई की लेकिन आदेश की प्रति शुक्रवार को मिल पायी। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में जोन्स एस्टेट क्षेत्र की जमीन की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं। मुख्य विवाद यह है कि संबंधित भूमि वन भूमि है या राजस्व भूमि। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन देकर भूमि रिकॉर्ड का निरीक्षण कर सकते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदन मिलने पर राजस्व अधिकारी रिकॉर्ड निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराएंगे। इसके साथ ही न्यायालय ने याचिकाकर्ता को यह छूट भी दी है कि वह जांच के दौरान मिले तथ्यों और विवरणों को सारणीबद्ध चार्ट के रूप में अदालत के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं।
