Uttrakhand: ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक से लाइसेंस बनाने में छूट रहे पसीने
काशीपुर, अमृत विचार। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से बनाए गए ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक ने लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। अब वाहन का लाइसेंस बनवाने में आवेदकों के पसीने छूट रहे हैं। बार-बार टेस्ट में फेल होने के कारण पिछले वर्ष की तुलना में मार्च-अप्रैल में 50 प्रतिशत से भी कहीं कम ड्राइविंग लाइसेंस बने हैं। हालांकि अधिकारी इस प्रक्रिया को पारदर्शिता बढ़ाने और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने वाला बता रहे हैं।
एआरटीओ कार्यालय काशीपुर में पिछले वर्ष नए भवन के साथ ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक बनाया गया था। इसमें सेंसर और कैमरे लगाए गए हैं, जिसका कंट्रोल रूम देहरादून स्थित मुख्यालय में है। इसका उद्देश्य कार्य में पारदर्शिता लाना और केवल दक्ष चालकों को ही लाइसेंस जारी करना है। बीते बरसात के दौरान कैमरे खराब होने से कुछ समय तक मैन्युअल टेस्ट लिया गया, लेकिन 18 मार्च से सिस्टम फिर से शुरू कर दिया गया। अब आवेदकों को ट्रैक पर वाहन चलाकर टेस्ट देना होता है, जिसमें कई लोग बार-बार फेल हो रहे हैं। इससे लाइसेंस बनने की संख्या में गिरावट आई है और राजस्व पर भी असर पड़ा है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 1 मार्च से 30 अप्रैल तक 1026 ड्राइविंग लाइसेंस बने थे, जबकि इस वर्ष इसी अवधि में केवल 465 लाइसेंस ही बन पाए हैं। इनमें पुरुष और महिला दोनों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
काशीपुर एआरटीओ प्रशासन पूजा नयाल ने बताया कि ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक 18 मार्च से शुरू हो चुका है। मार्च-अप्रैल तक डीएल कम बने हुए हैं। फेल होने वाला चालक सात-सात दिन के बाद तीन बार ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। इसके बाद भी फेल होने पर उन्हें साठ दिन बाद आवेदन करना होगा। डीएल से पिछले सत्र में करीब 1 करोड़ 39 लाख और 2025-26 में 1 करोड़ 14 लाख राजस्व जमा हुआ।
