रक्तदान से जीवनदान का संदेश : अमृत विचार परिवार ने निभाई सामाजिक जिम्मेदारी, 18 लोग रक्तदान कर बने महादानी

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Published By Deepak Mishra
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अमृत विचार, चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन और रॉयल कैफे के संयुक्त शिविर में उमड़ा उत्साह, केजीएमयू ब्लड बैंक का मिला सहयोग

लखनऊ, अमृत विचार : सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाते हुए दैनिक समाचार पत्र अमृत विचार, चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन और रॉयल कैफे के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को हजरतगंज स्थित रॉयल कैफे में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के ब्लड बैंक के सहयोग से आयोजित इस शिविर में 18 लोगों ने रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एएसपी विजिलेंस बबिता सिंह, विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जेपी मौर्या, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य सलाहकार डॉ. एचबी सिंह, अमृत विचार समूह के सीओओ पार्थो कुनार, समूह संपादक राजेश श्रीनेत, कार्यकारी संपादक अनिल त्रिगुणायत, मुद्रक एवं प्रकाशक त्रिनाथ शुक्ला और चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापक ओम कुमारी सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

मुख्य अतिथि बबिता सिंह ने लोगों से अधिक से अधिक रक्तदान करने की अपील करते हुए कहा कि एक यूनिट रक्त कई लोगों की जिंदगी बचा सकता है। रक्तदान से शरीर में नया खून बनता है और व्यक्ति स्वस्थ रहता है। बबिता ने रक्तदान भी किया। अमृत विचार समूह के सीईओ पार्थो कुनार ने कहा कि सामाजिक कार्यों से जुड़े रहने के कारण अक्सर जरूरतमंदों के लिए रक्त की मांग आती रहती है। ऐसे शिविरों से ब्लड बैंकों में दुर्लभ रक्त समूह भी उपलब्ध हो पाते हैं।

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उन्होंने कहा कि अमृत विचार सामाजिक सरोकारों से जुड़े हर अभियान में आगे रहकर योगदान देता रहेगा। पार्थो कुनार ने भी रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया। इस अवसर पर राजेश श्रीनेत, अनिल त्रिगुणायत और ओम कुमारी सिंह ने भी रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोगों को जागरूक किया। कार्यक्रम में रॉयल कैफे से संदीप आहूजा सहित अमृत विचार की टीम मौजूद रही।

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26 बार रक्तदान कर चुके डॉ. एचबी सिंह बोले- अब डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन ने किया बाहर

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य सलाहकार डॉ. एचबी सिंह ने कहा कि वे अब तक 26 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि नियमित रक्तदान का ही परिणाम है कि 73 वर्ष की उम्र में भी उन्हें अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की गाइडलाइन के अनुसार 18 से 65 वर्ष तक के स्वस्थ व्यक्ति ही रक्तदान कर सकते हैं, जिसके चलते अब वे रक्तदान नहीं कर पा रहे हैं।
वहीं क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्या ने कहा कि रक्तदान से किसी की जिंदगी बचती है, इससे बड़ी खुशी कोई नहीं हो सकती। लोगों को इसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझना चाहिए।

रक्तदान से हार्ट अटैक का खतरा होता है कम

केजीएमयू ब्लड बैंक की टीम के डॉ. विजय प्रताप और डॉ. जिगनेश मिश्रा ने बताया कि 18 से 65 वर्ष तक का स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल दूसरों की जान बचाने का माध्यम नहीं, बल्कि यह स्वयं दानदाता के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। विशेषज्ञों के मुताबिक नियमित रक्तदान से शरीर में आयरन का स्तर संतुलित रहता है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम होता है। रक्तदान के बाद शरीर नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है। साथ ही रक्तदान से पहले होने वाला स्वास्थ्य परीक्षण कई छिपी बीमारियों की समय रहते पहचान करने में मदद करता है।

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रक्तदान कराने वाली केजीएमयू की टीम

डॉ. विजय प्रताप, डॉ. जिगनेश मिश्रा, नर्सिंग ऑफिसर विष्णु कुमार, टेक्नीशियन कमल किशोर, ब्रजेश कुमार, सुरेश सिंह, दिनेश चंद्र गौतम, रामनिवास, अनूप कुमार, धर्मेंद्र, अखिलेश राजपूत, विशाल तथा स्टूडेंट्स ब्यूटी, काजल, अनन्या सिंह और भावना कुमारी ने शिविर को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

बोले महादानी
  1. खून किसी मशीन में नहीं बनता। हमारे शरीर से निकला रक्त ही किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाता है। रक्तदान से कोई नुकसान नहीं, बल्कि कई स्वास्थ्य लाभ हैं... शशांक चतुर्वेदी, 24 बार रक्तदाता।
  2. रक्तदान करने से नया रक्त बनता है और मन में संतोष मिलता है कि हमारे रक्त से किसी का जीवन बच सकता है... सोहित पांडेय, चार बार रक्तदाता।
  3. नियमित रक्तदान दुर्घटना, सर्जरी या गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवनदान साबित होता है। मैं रक्तदान करने के लिए दूसरों को भी जागरूक करता हूं... अरुण तिवारी, तीन बार रक्तदाता।
  4. नियमित रक्तदाता की पहचान उसकी इंसानियत और सेवा भाव से होती है। मैं खुद रक्तदान करने के साथ दूसरों को भी प्रेरित करता हूं... पीयूष पांडेय, 13वीं बार रक्तदाता।
  5. हमारे खून से किसी की जिंदगी बचती है, यही सोच रक्तदान के लिए प्रेरित करती है.. विनय कुमार सिंह, तीन बार रक्तदाता।
  6. समय-समय पर रक्तदान करने से स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ती है और दूसरों की मदद करने का संतोष मिलता है... शिव शंकर सिंह, 12 बार रक्तदाता।
  7. रक्तदान के बाद शरीर अधिक सक्रिय और हल्का महसूस होता है। नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण इसका बड़ा कारण है... विनोद कुमार सिंह, छह बार रक्तदाता।
ये बने महादानी

शशांक चतुर्वेदी, पीयूष पांडेय, नवनीत मिश्रा, सोहित पांडेय, अरुण तिवारी, शिवशंकर सिंह, विनय कुमार सिंह, विनोद सिंह, हिमांशी जायसवाल, बबिता सिंह, पार्थो कुनार, रंजीत मंडल, विवेक कुमार, परवेश कुमार, प्रिंस शर्मा, मो.सादिक, अक्षत लहरी।

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