World Hypertension Day: प्रेग्नेंसी में हाई बीपी है जानलेवा खतरा... हर 10 में 5 महिलाएं प्रभावित, जानें क्या है एक्सपर्ट की राय
लखनऊ, अमृत विचार : अनियमित जीवनशैली के कारण महिलाएं गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ रक्तचाप की चपेट में आ जाती हैं, जो मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। इसके आलावा हार्ट अटैक का भी कारण उच्च रक्तचाप बन रहा है। इसके परती लोगों को जागरूक करने के लिए वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे (विश्व उच्च रक्तचाप दिवस) हर साल 17 मई को मनाया जाता है।
क्वीन मेरी अस्पताल की प्रसूति एवं महिला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल के मुताबिक गर्भावस्था में उत्पन्न उच्च रक्तचाप ऐसी खतरनाक स्थिति है, जो आमतौर पर गर्भावस्था के 20 सप्ताह बाद सामने आती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और सही उपचार न मिलने पर यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। आंकड़े बताते हैं कि समुदाय में करीब 10 से 15 प्रतिशत गर्भवतियां उच्च रक्तचाप से प्रभावित होती हैं। वहीं क्वीन मेरी अस्पताल आने वाली हर 10 गर्भवतियों में से 4 से 5 महिलाएं उच्च रक्तचाप या उससे जुड़ी जटिलताओं से ग्रसित मिल रही हैं।
चिकित्सकों के लिए डिजिटल नेटवर्किंग और व्हाट्सएप ग्रुप संचालन
डॉ. अंजू अग्रवाल ने बताया कि यूनिसेफ के सहयोग से विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया गया है। अब एएनएम स्तर तक ऑनलाइन प्रशिक्षण के जरिए खतरे के लक्षणों की पहचान और शुरुआती प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने सलाह दी कि गर्भवती महिलाओं का बीपी हमेशा बैठी और आराम की स्थिति में मापा जाना चाहिए। साथ ही यदि बीपी बढ़ा हुआ हो तो प्रसव विशेषज्ञों की निगरानी में ही कराया जाए।
140/90 के पार पहुंचेबीपी तो खतरे की घंटी
क्वीन मेरी अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ प्रो. सुजाता देव के अनुसार गर्भवती महिला का रक्तचाप यदि 140/90 mmHg या उससे अधिक हो तो इसे गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप माना जाता है। वहीं 160/110 mmHg या उससे ऊपर की स्थिति बेहद गंभीर मानी जाती है। तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेना उचित है।
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