शम्मी कपूर की नस नस में बहता था रोमांस!
शम्मी कपूर का नाम जुबां पर आते ही ज़हन में एक रॉकस्टार की तस्वीर बनती है। उन्हें पाथब्रेकर भी कहा जाता था और रीबल स्टार भी। अब यह एक अलग किस्सा है कि शम्मी में एक विद्रोही एक्टर कैसे, और किन हालात में जन्मा, जिसने हिंदी सिनेमा में एक्टिंग की धारा ही बदल डाली। बहरहाल, …
शम्मी कपूर का नाम जुबां पर आते ही ज़हन में एक रॉकस्टार की तस्वीर बनती है। उन्हें पाथब्रेकर भी कहा जाता था और रीबल स्टार भी। अब यह एक अलग किस्सा है कि शम्मी में एक विद्रोही एक्टर कैसे, और किन हालात में जन्मा, जिसने हिंदी सिनेमा में एक्टिंग की धारा ही बदल डाली। बहरहाल, यहां ज़िक्र उस शम्मी है जिसकी नस नस में रोमांस बहता था।
ग्रेट पृथ्वीराज कपूर और शोमैन राजकपूर के छोटे भाई होने के कारण शम्मी को फिल्म इंडस्ट्री में सभी जानते थे, लेकिन अपनी जगह बनाने के लिए उन्हें एक आम इंसान की तरह खासा संघर्ष करना पड़ा। उनकी पहली फिल्म थी – ‘रेल का डिब्बा'(1953), जिसकी नायिका थी मधुबाला। शम्मी उन्हें देखते ही गश खा गए। इतनी खूबसूरत स्त्री उन्होंने इससे पहले कभी नहीं देखी थी।

शम्मी की ऑटोबॉयोग्राफी ‘दि गेम चेंजर’ में लिखा है कि जब मधु पानी पीती थी तो उसके गले की नस से पानी नीचे उतरता हुआ साफ़ दिखता था। हालांकि शम्मी को मालूम था कि दिलीप कुमार और मधु में ज़बरदस्त रोमांस है। लेकिन इसके बावज़ूद वो खुद को मधु पर फ़िदा होने से नहीं रोक पाए। प्रोफेशन में मधु बहुत सीनियर थीं। पहले दिन सेट पर शम्मी को देख कर हंस दी थी – क्या ये लड़का रोमांस करेगा? लेकिन बाद में मधु ने ही शम्मी को सहज किया।

एक दिन बहुत हिम्मत करके शम्मी ने मधु को प्रोपोज़ कर ही दिया। मधु तो मज़ाक समझ कर हंस दी, लेकिन शम्मी इतने उतावले हो गए कि घर में मां से बात कर ली। घर में बड़ा बवाल खड़ा हुआ। ज़माना दकियानूसी का था। न जाति देखी और न धर्म और फिर सब जानते थे कि मधु किससे प्यार करती है। बामुश्किल शम्मी के सर से मधु का भूत उतरा। इसके बाद शम्मी ने मधु के साथ नक़ाब (1955) और बॉयफ्रेंड (1961) में काम किया लेकिन तब तक पुल के नीचे बहुत पानी बह चुका था।

वहीं शम्मी और नूतन के परिवार एक ही एरिया में रहते थे। दोनों साथ साथ पले-बड़े थे। डेटिंग भी करते थे। नूतन बहुत इंटेलीजेंट थी। समय से आगे की सोच और बलां की जिज्ञासू, चुलबुली और ज़बरदस्त सेंस ऑफ़ ह्यूमर भी। संपूर्ण स्त्री नूतन की पहली फिल्म ‘नगीना’ (1951) के प्रीमियर पर शम्मी उनके साथ थे, लेकिन 16 साल की नूतन को गेटकीपर ने इस एडल्ट फिल्म को देखने से रोक दिया। इन दोनों की पहली फिल्म ‘लैला मजनूं’ (1953) थी। ये बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी। न शम्मी मजनूं दिखे और न नूतन लैला। बाद में नूतन से शादी की बात भी चली। नूतन की मां शोभना समर्थ को इस रिश्ते पर कोई ऐतराज नहीं था।

समर्थ परिवार के हितैषी मोतीलाल इस रिश्ते के हक़ में नहीं थे। उनकी निगाह में बिगड़ैल और आवारा शम्मी का कोई फ्यूचर नहीं है। पचास के दशक के ख़त्म होने तक दोनों स्टार बन चुके थे। शम्मी को 1959 में नूतन के साथ ‘बसंत’ ऑफर हुई। बिना स्क्रिप्ट सुने शम्मी ने हां कर दी। यह फिल्म दोनों के बीच लव सीन की गर्माहट के कारण बहुत चर्चित हुई। इसके बाद 1967 में शम्मी कपूर और नूतन की एक और फिल्म आयी – लाटसाहब किसी सेंसेशन की आशा रखने वाले बहुत निराश हुए।
1953 में राजकपूर-दिलीप कुमार की एक क्रिकेट टीम हिंदी फिल्मों को प्रमोट करने सीलोन (श्रीलंका) गयी। शम्मी कपूर टीम के मेंबर थे। वहां उन्होंने एक शाम एक कैबरे देखा, उनका दिल बैले डांसर पर आ गया। वो मिस्र की नाडिया जमाल थी, बलां की खूबसूरत। शम्मी उससे मिले और उसके हुस्न की बहुत तारीफ़ की। उसे बंबई आने का निमंत्रण दिया। कुछ दिन बाद नाडिया अपने शो के सिलसिले में बंबई आई। शम्मी की गेस्ट बनीं। शम्मी ने उसे अपने परिवार से मिलवाया। फिर प्रोपोज़ किया। लेकिन नाडिया तब सिर्फ सत्रह साल की थी और शम्मी बाईस के. नाडिया दुनिया को आगे भी देखना चाहती थी। तय यह हुआ कि पांच साल इंतज़ार करते हैं और अगर तब एक-दूसरे के प्रति प्रेम ऐसे ही बना रहा तो बात आगे बढ़ेगी, लेकिन इससे पहले ही नाडिया ने शादी कर ली और इधर शम्मी को गीताबाली मिल गयीं।

‘रंगीन रातें’ (1956) की शूटिंग के दौरान दिलफेंक शम्मी ने गीताबाली को प्रोपोज़ किया। इस बार वो वाकई बहुत सीरियस थे। गीताबाली कई दिन तक हंस कर टालती रही लेकिन एक दिन उसने एक शर्त रख दी – शादी होगी तो आज ही और अभी रात के बारह बजे का समय था। सुबह चार बजे मंदिर खुलवाया गया। चंद दोस्तों के समक्ष दोनों ने शादी कर ली. 24 अगस्त 1955 से लेकर अपनी मृत्यु के दिन 21 जनवरी 1965 तक गीताबाली ने शम्मी कपूर के दिल पर एकछत्र राज किया और शम्मी ने भी कोई भी फैसला गीता से पूछे बिना नहीं किया।

चार साल बाद शम्मी कपूर ने ज़िंदगी को फिर से जीने का फैसला किया और नीला देवी से शादी कर ली, इस रज़ामंदी के साथ कि औलाद पैदा नहीं करेंगे और गीता से उत्पन्न बच्चों को पालेंगे। 21 अक्टूबर 1931 को जन्मे शम्मी कपूर 14 अगस्त 2011 को किडनी से संबंधित लम्बी बीमारी झेलते हुए परलोकवासी हुए।
– वीर विनोद छाबड़ा
