पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड बुरहान हमजा की हत्या, पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों ने मारी गोली

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले पर 2019 में हुए आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता और नामित आतंकवादी अर्जुमंद गुलजार उर्फ ​​बुरहान हमजा की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। हमजा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की कड़ी सुरक्षा में अपनी गतिविधियों को अंजाम देता था और उसपर मुजफ्फराबाद में घात लगाकर हमला किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि हमले में हमजा गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसे हवाई मार्ग से रावलपिंडी के संयुक्त सैन्य अस्पताल (सीएमएच) ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। उन्होंने आगे बताया कि स्थानीय सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई से पहले ही हमलावर घटनास्थल से फरार होने में कामयाब रहे। हमजा मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के खार का रहने वाला था और अल बद्र संगठन से जुड़ा हुआ था।

इसके बाद वह अल बराक नामक आतंकी संगठन में शामिल हो गया और संगठन से मतभेद के बाद अलग होने के बावजूद आईएसआई के साथ करीबी रिश्ते बनाए रखे। उसे 14 फरवरी, 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा किए गए आत्मघाती आतंकी हमले की साजिश रचने का सूत्रधार होने के आरोप में यूपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया गया था।

इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की जान चली गई थी। इसके जवाब में, भारतीय सुरक्षा बलों ने 26 फरवरी, 2019 को एयर स्ट्राइक कर बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर को नष्ट कर दिया। सूत्रों के मुताबिक हमजा का उपनाम डॉक्टर भी था। वह मौजूदा समय में मुजफ्फराबाद के बाहरी इलाके में स्थित घनी आबादी वाले चीला बांदी में रह रहा था।

उसकी सुरक्षा में आठ कमांडो, एक बुलेट-प्रूफ (बीआर) वाहन और एक एस्कॉर्ट वाहन तैनात किया गया था, जो पाकिस्तान सरकार द्वारा उसे दिये जा रहे महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने बताया कि जनवरी और फरवरी 2025 के बीच कथित तौर पर खुद पर हुए हमले की मनगढ़ंत कहानी बनाने के बाद उसे सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। हमजा ने अल बराक के पूर्व कमांडर फारूक कुरैशी के साथ मिलकर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया।

कुरैशी का नाम कश्मीर घाटी में मादक पदार्थों की तस्करी, जाली मुद्रा गिरोह, हथियारों की तस्करी और सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में बार-बार सामने आया है। सूत्रों ने बताया कि दोनों मुजफ्फरबाद में ''माछिस फैक्टरी' के नाम से मशहूर एक औद्योगिक परिसर से अपना धंधा चलाते थे। उन्होंने बताया कि हमजा के पाकिस्तान की अंतर-सेवा खुफिया एजेंसी(आईएसआई), विशेष रूप से कर्नल रिजवान नामक एक अधिकारी के साथ घनिष्ठ संबंध थे, जो गहरे खुफिया संबंधों और संरक्षण का संकेत देते हैं।

हमजा ने हाल ही में कुपवाड़ा के रहने वाले कादिर लाला की बेटी से शादी की थी, जो हिजबुल मुजाहिदीन का पूर्व सदस्य था और वर्तमान में पाकिस्तान के चक शहजाद में आतंकी समूह की आवासीय परियोजना में सुरक्षाकर्मी के रूप में कार्यरत है। सूत्रों ने बताया कि उसके पुलवामा के एक अन्य पूर्व हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी मुर्तजा से भी घनिष्ठ थे, जो अब इस्लामाबाद में रहता है, और वह अक्सर उसके आवास पर जाया करता था।

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