बाराबंकी माती चौकी कांड केस में 11 साल बाद आया फैसला, 22 दोषियों को 7-7 साल कैद की सजा
बाराबंकी, अमृत विचार। 11 साल पहले माती चौकी में तोड़फोड़, आगजनी के प्रकरण में न्यायालय ने 22 अभियुक्तों को दोषसिद्ध करार दिया और सभी को सात सात साल कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि सभी को धारा 307 में दोषमुक्त किया गया है। सजा सुनते ही परिजन गमगीन हो गए।
बताते चलें कि यह मामला वर्ष 2015 में देवा थाना क्षेत्र के माती चौकी का है। जमीन के पैसों के विवाद में सुभाष राजवंशी की मौत के बाद इलाके में भारी बवाल हो गया। आरोप लगाया गया कि देवा थाने के सिपाही प्रभुनाथ यादव की पिटाई से सुभाष की मौत हो गई थी। घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में लोग माती चौकी पहुंच गए और चौकी का घेराव कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
देखते ही देखते उग्र हुई भीड़ ने चौकी में तोड़फोड़, आगजनी व लूटपाट की घटना कर डाली। इस दौरान पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया था। मामले में पुलिस ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं, सीएलए एक्ट तथा लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज कर 24 लोगों को नामजद किया था, वहीं करीब 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया।
सुनवाई के दौरान दो नामजद आरोपियों की मौत भी हो चुकी है। सुनवाई के बाद कोर्ट संख्या-2 के न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह प्रथम ने कन्हैया रावत, कमलेश वर्मा, सर्वेश कुमार, कमलेश रावत, सोनेलाल रावत, राकेश रावत, राजेश वर्मा, रामू, अजय वर्मा, रंजीत रावत, अंगद रावत, रिंकू वर्मा समेत 22 अभियुक्तों को दोषी मानते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई। जबकि आईपीसी की धारा 307 के आरोप को साक्ष्य के अभाव में हटा दिया गया।
