पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांगजन विभाग के विलय पर मंथन, छात्रवृत्ति राशि बढ़ाने और आय सीमा में ढाई गुना वृद्धि पर भी योगी सरकार कर रही विचार
समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव ने रखा प्रस्ताव, मंत्री नरेंद्र कश्यप ने दिया विचार का आश्वासन
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभागों के विलय की संभावना पर शासन स्तर पर मंथन शुरू हो गया है। सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने दोनों विभागों को एकीकृत करने का प्रस्ताव मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप के समक्ष रखा। मंत्री ने इस पर विचारोपरांत निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
बैठक में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि पिछड़े वर्गों और दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए सरकार के पास पर्याप्त बजट उपलब्ध है और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सभी जिलों में विभागीय स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
मंत्री ने शासकीय विशेष विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि स्थायी नियुक्तियां होने तक संविदा के आधार पर शिक्षकों की तैनाती कर पढ़ाई-लिखाई सुचारु रूप से शुरू कराई जाए।
बैठक में प्रमुख सचिव ने सुझाव दिया कि पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की अलग वेबसाइट विकसित की जाए, ताकि विभागीय योजनाओं की जानकारी और लाभ समयबद्ध तरीके से पात्र लोगों तक पहुंच सके। वर्तमान में दोनों विभाग समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित होते हैं। बैठक में निदेशक पिछड़ा वर्ग कल्याण उमेश प्रताप सिंह सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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छात्रवृत्ति बढ़ाने पर सरकार का विचार
मंत्री नरेंद्र कश्यप ने बताया कि पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति राशि 2250 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये किए जाने पर विचार चल रहा है। इसके साथ ही छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित वार्षिक आय सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
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