UP News: 15 बयानों से बढ़ी मुश्किलें, जांच में खुलने लगा करोड़ों के खेल का राज
लखीमपुर खीरी/निघासन। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत विकासखंड निघासन के बेलरायां क्लस्टर में स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए करोड़ों रुपये के ऋण में कथित अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। जांच के लिए गठित टीम बुधवार को निघासन ब्लॉक पहुंची, जहां ब्लॉक सभागार में समूहों से जुड़े 15 लोगों के बयान दर्ज किए गए। जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी बयानों की वीडियोग्राफी भी कराई गई। जांच में बड़े पैमाने पर बड़ी वित्तीय अनियमितता पाई गई है। इससे अफसरों और सीएलएफ की पदाधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
15 महिलाओं के बयान दर्ज
बुधवार को जांच टीम ब्लॉक सभागार पहुंची। टीम में शामिल सहायक विकास अधिकारी ग्राम्य विकास अनुज कुमार अवस्थी, फूलबेहड़ के अनुराग पांडेय और निघासन के प्रभारी सहायक विकास अधिकारी राकेश कुमार स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 15 महिलाओं के बयान दर्ज किए गए। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। जांच टीम ने समूह सदस्यों से ऋण वितरण, चयन प्रक्रिया और धनराशि के उपयोग से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी ली। सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में कुछ अधिकारी प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं।
फर्जी मुहर का हुआ इस्तेमाल
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा ग्राम संगठन पचपेड़ा से जुड़ा सामने आया। बताया जाता है कि जांच टीम को मिले साक्ष्यों और बयानों के आधार पर फर्जी मोहर और जाली हस्ताक्षरों के जरिए पांच लाख रुपये की निकासी की पुष्टि हुई है। इसके अलावा भी बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता पाई गई है। टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किन-किन लोगों की भूमिका रही और निकाली गई धनराशि का उपयोग कहां किया गया। सूत्रों के अनुसार बेलरायां क्लस्टर से जुड़े कई अन्य ग्राम संगठनों के खातों में भी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के संकेत मिले हैं। टीम संबंधित बैंक खातों, प्रस्ताव पुस्तिकाओं, उपस्थिति पंजिकाओं और वित्तीय अभिलेखों का मिलान कर रही है।
इन बिंदुओं पर ली जानकारी
जांच टीम ने समूह सदस्यों से ऋण वितरण, चयन प्रक्रिया और धनराशि के उपयोग से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी ली। इस दौरान कमीशन लेने के आरोप को भी काफी बल मिला है। बताते हैं कि जीवन समूह की एक महिला सदस्य ने एक लाख रुपये नगद मिलने की बात कही है, जो गाइडलाइन के विपरीत है। कई महिला सदस्यों ने कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज जांच टीम को उपलब्ध कराए। जांच के समय ब्लॉक मिशन मैनेजर इंदू, सुनील सहित सीएलएफ अध्यक्ष सुनीता देवी, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी श्रीवास्तव और सचिव सुकेता तिवारी मौजूद रहीं।
जांच के बाद नपेंगे अधिकारी
रिपोर्ट सामने आने के बाद कई पदाधिकारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है। जांच अधिकारी अनुज अवस्थी ने बताया कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है। समूह सदस्यों के बयान दर्ज करने के साथ ही उपलब्ध अभिलेखों का भी मिलान कराया गया है। जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे अगले दो दिनों के भीतर उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा।
सिंगहा खुर्द समेत अन्य ग्राम संगठनों की जांच की मांग तेज
मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जांच का दायरा बढ़ाकर जिले के बाहर के अधिकारियों अथवा स्वतंत्र एजेंसी से भी पड़ताल कराई जाए तो सिंगहा खुर्द, लालापुर, सूरतनगर, उमरा, चितिहा, लुधौरी सहित कई ग्राम सभाओं में हुए कथित अनियमितताओं के नए तथ्य सामने आ सकते हैं। समूह की महिलाओं का आरोप है कि सीएलएफ की पदाधिकारियों ने हेरेफेरी कर गबन किए गए धन को आठ से 10 प्रतिशत के ब्याज पर लोगों को दे रखा है। लालापुर समेत कई ग्राम संगठन दो से तीन प्रतिशत तक ब्याज वसूल रहे हैं, जबकि एक प्रतिशत पर ही ऋण पर ब्याज लिए जाने का नियम है।
तीन पदाधिकारी वर्षों से नियम विरुद्ध पदों पर मिले काबिज
सूत्रों ने बताया कि बयानों और उपलब्ध अभिलेखों की पड़ताल में यह सामने आया कि बेलरायां क्लस्टर की अध्यक्ष सुनीता देवी, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी देवी तथा सचिव सुकेता तिवारी निर्धारित अवधि से कहीं अधिक समय से अपने-अपने पदों पर बनी हुई हैं। ये पदाधिकारी तीन वर्ष से अधिक समय से लगातार पद पर काबिज हैं, जबकि एनआरएलएम की गाइडलाइन में किसी भी पदाधिकारी का कार्यकाल अधिकतम दो वर्ष निर्धारित है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद नए पदाधिकारियों का चयन किया जाना अनिवार्य होता है। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि कुछ पदाधिकारी पूर्व में भी इन्हीं जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नियमों का खुला उल्लंघन होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। जांच टीम अब इस पहलू पर भी गंभीरता से काम कर रही है कि कहीं अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही के कारण तो यह स्थिति पैदा नहीं हुई।
