कैंपस का पहला दिन : वर्तमान और भविष्य की नई यात्रा

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Published By Anjali Singh
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जीवन में कुछ दिन ऐसे होते हैं, जो समय बीत जाने के बाद भी स्मृतियों में उसी ताजगी के साथ बने रहते हैं। मेरे लिए महाविद्यालय का पहला दिन भी ऐसा ही एक अविस्मरणीय अनुभव है। माध्यमिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए विषय और संकाय के चयन की चुनौती सामने थी। काफी सोच-विचार और मार्गदर्शन के बाद मैंने बीए.एलएलबी पाठ्यक्रम को चुना। प्रवेश परीक्षा और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद जब मुझे प्रवेश मिला, तब मन में उत्साह के साथ-साथ अनेक आशंकाएं भी थीं।

कॉलेज के पहले दिन जब मैं परिसर में पहुंचा, तो सब कुछ नया और अपरिचित लग रहा था। विद्यालय और महाविद्यालय के वातावरण में बहुत अंतर था। स्कूल में जहां शिक्षक विद्यार्थियों पर निरंतर ध्यान देते थे और विषयों को सरलता से समझाते थे, वहीं कॉलेज में अध्ययन की शैली अधिक स्वतंत्र और गंभीर दिखाई दी। विशाल भवन, विभिन्न विभाग, पुस्तकालय और परिसर में घूमते सैकड़ों छात्र-छात्राएं देखकर मन में एक अलग ही भावना उत्पन्न हुई।

पहले दिन मेरे मन मंत कई प्रश्न उमड़ रहे थे। क्या मैं यहां की पढ़ाई के साथ तालमेल बिठा पाऊंगा? क्या नए मित्र बनेंगे? क्या मैं इस प्रतिस्पर्धी माहौल में सफल हो सकूंगा? वरिष्ठ छात्रों के बारे में सुनी हुई बातें भी मन में हल्का-सा भय पैदा कर रही थीं। हालांकि यह भय अधिकतर कल्पना पर आधारित था।

कक्षा में प्रवेश करते समय दिल की धड़कनें तेज थीं, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, माहौल सहज होता गया। सहपाठियों से परिचय हुआ और कुछ ही देर में बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया। अध्यापकों ने भी विद्यार्थियों का स्वागत किया और पाठ्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उनके प्रेरणादायक शब्दों ने मेरे मन का संकोच दूर कर दिया। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि कॉलेज केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की एक महत्वपूर्ण पाठशाला भी है।

धीरे-धीरे मैंने नए वातावरण को स्वीकार किया और अध्ययन में मन लगाने लगा। अच्छे मित्रों और शिक्षकों के सहयोग से आत्मविश्वास बढ़ता गया। आज जब सफलतापूर्वक अपनी उपाधि प्राप्त कर चुका हूं, तब भी महाविद्यालय का पहला दिन स्मृतियों में जीवंत है। उस दिन का संकोच, उत्सुकता, आशंका और नया अनुभव आज भी याद आते ही चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं। वास्तव में, कॉलेज का पहला दिन मेरे जीवन की नई यात्रा का वह आरंभ था, जिसने मेरे वर्तमान को संवारने और भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आयुष द्विवेदी अध्यक्ष, युवा उद्योग व्यापार मंडल, कानपुर नगर

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