दिल्ली-एनसीआर समेत केरल में मानसून की दस्तक,यूपी के इन जिलों में अगले तीन दिन बारिश की बौछार, फिर लौटेगी लू
लखनऊ। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने बृहस्पतिवार को केरल में दस्तक दे दी। आमतौर पर मानसून एक जून के आसपास केरल पहुंचता है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून ऋतु (जून से सितंबर) की शुरुआत का संकेत माना जाता है।
आईएमडी ने कहा, ''दक्षिण-पश्चिम मानसून चार जून, 2026 को दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के शेष हिस्सों, पश्चिम-मध्य और पूर्व-मध्य अरब सागर के कुछ भागों, पूरे लक्षद्वीप द्वीपसमूह, केरल और माहे, कर्नाटक तथा तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, कोमोरिन क्षेत्र के शेष भागों, दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी तथा दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों तक आगे बढ़ गया है।'
दिल्ली में आंधी और तेज बारिश से लोगों को गर्मी से मिली राहत
दिल्ली के कई हिस्सों में गुरुवार दोपहर को हुई बारिश से पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी से राहत मिली है। राष्ट्रीय राजधानी के कुछ हिस्सों में दिन में तेज आंधी के बाद बारिश हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, गुरुवार दोपहर 2:30 बजे तक मयूर विहार स्टेशन पर सबसे अधिक 23 मिमी बारिश दर्ज की गयी, जो 'मध्यम बारिश' की श्रेणी में आती है।
आयानगर, पुष्प विहार, पालम और प्रगति मैदान में भी हल्की बारिश दर्ज की गयी, जहां सुबह 11:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे के बीच क्रमशः 14.2, 10.5, 5.8 मिमी और 3.6 मिमी बारिश दर्ज की गयी। मौसम विभाग ने शाम तक मध्य दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, नई दिल्ली, उत्तरी दिल्ली, उत्तर पूर्वी दिल्ली, उत्तर पश्चिमी दिल्ली, शाहदरा, दक्षिणी दिल्ली, दक्षिण पूर्वी दिल्ली, दक्षिण पश्चिमी दिल्ली और पश्चिमी दिल्ली सहित दिल्ली के सभी जिलों में 'रेड अलर्ट' जारी किया है।
विभाग ने पूरी दिल्ली में भारी बारिश का अनुमान व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रति घंटे 15 मिमी से अधिक बारिश हो सकती है। इसके साथ ही आंधी, बिजली कड़कने तथा 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है।
अगले तीन दिनों तक यूपी में बदलेगा मौसम
यूपी में अगले तीन दिनों तक मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार चार से छह जून के बीच प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बारिश और बौछारें पड़ सकती हैं। इस दौरान तेज हवाएं चलने तथा कुछ स्थानों पर वज्रपात की भी आशंका जताई गई है।
मौसम केंद्र, लखनऊ द्वारा गुरुवार को जारी दैनिक मौसम पूर्वानुमान बुलेटिन के अनुसार 4, 5 और 6 जून को पश्चिमी एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर वर्षा और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। हालांकि 7 जून से मौसम फिर शुष्क होने लगेगा और 10 जून तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की संभावना नहीं है।
IMD ने जारी किया अलर्ट
विभाग ने चार जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने के साथ मेघगर्जन और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। कुछ स्थानों पर हवा की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। पांच जून को भी प्रदेश के दोनों हिस्सों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं, मेघगर्जन और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी रहेगी। 6 जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए कोई विशेष चेतावनी नहीं है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में मेघगर्जन, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
पश्चिमी और पूर्वी दोनों क्षेत्रों में लू चलने की संभावना
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि सात जून से पूर्वी उत्तर प्रदेश में तथा 8 जून से 10 जून तक पश्चिमी और पूर्वी दोनों क्षेत्रों में कहीं-कहीं लू चलने की संभावना है। इससे तापमान में बढ़ोतरी होने और लोगों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। मौसम विशेषज्ञों ने लोगों से आंधी-तूफान और वज्रपात के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी है।
इससे पहले मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि मानसून 26 मई को केरल पहुंचेगा। पिछले सप्ताह विभाग ने मौसमी वर्षा के अपने पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए कहा था कि इस वर्ष बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। आईएमडी के अनुसार, इस साल देश में मौसमी वर्षा, दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। एलपीए का मतलब किसी विशेष क्षेत्र में किसी निर्धारित अवधि जैसे एक महीने या मौसम के दौरान लंबे समय आमतौर पर 30 से 50 वर्षों में दर्ज औसत वर्षा से है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दी दस्तक
देशभर में मौसमी वर्षा का दीर्घकालिक औसत (एलपीए) 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर 87 सेंटीमीटर है। यदि मानसून के दौरान वर्षा एलपीए के 90 प्रतिशत से कम रहती है, तो आईएमडी उसे 'अल्प वर्षा' की श्रेणी में रखता है। सामान्य से कम वर्षा की संभावित वजहों में से एक अल नीनो की स्थिति का विकसित होना हो सकता है, क्योंकि इसके प्रभाव से भारत में मानसून के दौरान बारिश कम होती है।
फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तटस्थ अल नीनो-दक्षिणी दोलन की स्थिति अल नीनो की ओर बढ़ रही है। अल नीनो की स्थिति बनने से देश में मानसून वर्षा कम हो जाती है। आईएमडी ने कहा कि जून में अल नीनो की स्थिति कमजोर रहने की संभावना है, जबकि सितंबर तक इसके मध्यम से मजबूत होने की आशंका है।
