संपादकीय: आग बड़ी या लापरवाही
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक बीएनबी होटल में लगी भीषण आग राजधानी की प्रशासनिक विफलता, शहरी अव्यवस्था, नियामकीय भ्रष्टाचार और आपदा प्रबंधन की कमजोरियों का सामूहिक अभियोग है। हर बड़ी आग के बाद शोक, मुआवजा और जांच की घोषणा होती है, लेकिन कुछ महीनों बाद अगली त्रासदी तक सब कुछ सामान्य हो जाता है।
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक बीएनबी होटल में लगी भीषण आग राजधानी की प्रशासनिक विफलता, शहरी अव्यवस्था, नियामकीय भ्रष्टाचार और आपदा प्रबंधन की कमजोरियों का सामूहिक अभियोग है। हर बड़ी आग के बाद शोक, मुआवजा और जांच की घोषणा होती है, लेकिन कुछ महीनों बाद अगली त्रासदी तक सब कुछ सामान्य हो जाता है। छह कमरों की अनुमति ले 25 कमरे बना देना ऐसी अनियमितता नहीं है, जिसे प्रशासन देख न पाया हो। किसी भवन में अतिरिक्त निर्माण, व्यावसायिक उपयोग, बिजली लोड में वृद्धि, पानी और सीवर कनेक्शन, ग्राहकों की आवाजाही— ये सब खुलेआम दिखाई देने वाली गतिविधियां हैं। यदि वर्षों तक यह सब चलता रहा, तो इसका अर्थ है कि या तो निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय था, या फिर उसने जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं।
दिल्ली में जनवरी 2021 से मई 2026 के बीच आग की घटनाओं में सैकड़ों लोगों की मृत्यु और हजारों के घायल होने के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि समस्या किसी एक होटल या एक इलाके तक सीमित नहीं है। पालम, विवेक विहार, द्वारका, रिठाला और अब मालवीय नगर— लगातार हो रही घटनाएं बताती हैं कि हमने हादसों से सीखने की संस्कृति विकसित नहीं की है। दिल्ली में बड़ी संख्या में गेस्ट हाउस, पीजी, बीएनबी और ओयो आधारित आवासीय प्रतिष्ठान ऐसे क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं, जो मूलतः आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत हैं। इनमें से अनेक के पास वैध फायर एनओसी नहीं है, न पर्याप्त अग्निशमन उपकरण, न आपातकालीन निकास और न ही क्षमता के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था। यदि एक न्यायिक याचिका के अनुसार हजार से अधिक लाइसेंसी होटलों में से केवल कुछ दर्जन के पास फायर एनओसी है, तो यह किसी एक विभाग की नहीं बल्कि पूरे शासन तंत्र की विफलता है।
नगर निकाय का दावा है, इमारत का नक्शा स्वीकृत नहीं था, तो वह वर्षों तक संचालित कैसे होती रही? अग्निशमन विभाग की भूमिका भी कठघरे में है। अनापत्ति प्रमाणपत्र केवल एक कागज नहीं, जीवन सुरक्षा की गारंटी माना जाता है। यदि एनओसी नियमों की अनदेखी करके जारी की जाती है, या बिना एनओसी के प्रतिष्ठान चलने दिए जाते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि संभावित आपराधिक लापरवाही है। जांच में आग के कारणों के अलावा यह देखना होगा कि नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ और किन अधिकारियों ने उसे संरक्षण दिया। घटना की सबसे बड़ी सीख यह है कि भारत के महानगरों में अग्नि सुरक्षा को कागजी औपचारिकता नहीं, सार्वजनिक सुरक्षा का मूल तत्व माना जाए।
सभी होटलों, पीजी, गेस्ट हाउसों और बहुमंजिला इमारतों का समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट, डिजिटल निरीक्षण प्रणाली, सार्वजनिक एनओसी डेटाबेस, दोषी अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही और अवैध निर्माणों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई अनिवार्य की जानी चाहिए। साथ ही प्रत्येक जिले में नियमित अग्नि सुरक्षा अभ्यास और नागरिक जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। मालवीय नगर की यह त्रासदी हमें याद दिलाती है कि आग अक्सर चिंगारी से नहीं, लापरवाही से फैलती है। जब तक नियमों का उल्लंघन करने वालों और उन्हें संरक्षण देने वालों को कठोर दंड नहीं मिलेगा, तब तक ऐसी दुर्घटनाएं ‘दुर्भाग्य’ नहीं बल्कि ‘पूर्व घोषित त्रासदियां’ बनी रहेंगी।
