अग्निकांडों का अंतहीन सिलसिला और जवाबदेही
दिल्ली में लगातार कहीं न कहीं अग्निकांड की पुनरावृत्ति हो रही है। बीते कुछ वर्षों में हुए भंयकर अग्निकांडों से शासन-प्रशासन द्वारा सबक न लेना चिंता पैदा करता है।
दिल्ली में अग्निकांड की पुनरावृत्ति कब तक? इस सवाल का जवाब कोई नहीं देता? यही कारण है कि अग्निकांड देश की राजधानी के माथे पर बर्निंग कैपिटल का ठप्पा लगा रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में हुए भंयकर अग्निकांडों से शासन-प्रशासन द्वारा सबक न लेने का नतीजा है, मालवीय नगर अग्निकांड की घटना। दिल्ली में साल नहीं, बल्कि प्रत्येक महीने कहीं न कहीं अग्निकांड की पुनरावृत्ति हो रही है। लिबर्टी सिनेमा जैसे बड़े अग्निकांड तो मात्र बानगी हैं, उससे भी कहीं बढ़कर दर्दनाक घटनाएं लगातार जारी हैं।
मालवीय नगर घटना में कई विदेशी पर्यटक भी हताहत हुए हैं, जो भारत के लिए वैश्विक स्तर पर शर्मसार करने वाली घटन है। पिछले माह ही पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में एक घर में एसी ब्लास्ट से तीन परिवारों के नौ लोग जलकर मरे थे। उससे पहले पालम विहार में भी एक भीषण अग्निकांड में एक ही परिवार के नौ लोग जिंदा जलकर हलाक हुए थे। मुंडका, पहाड़गंज, जामिया नगर, मंडावली, सदर बाजार, चांदनी चैक की घटनाओं को भी दिल्ली वाले नहीं भूले हैं।
सवाल उठता है, क्या अग्निकांड की घटनाएं कभी रुक पाएंगी या यूं ही बेकसूर लोग आग के हवाले होते रहेंगे! कह सकते हैं कि मालवीय नगर अग्निकांड में 25 लोग जलकर मरे नहीं, बल्कि चरमराती व्यवस्था ने सामूहिक हत्याएं की हैं! मालवीय नगर अग्निकांड इतना दुखद है कि जिसने भी टीवी-अखबारों या सोशल मीडिया के जरिए तस्वीरों देखा या सुना, उनके मन को पूरी तरह से झकझोर दिया।
घटना के वक्त पीड़ितों की मदद की गुहार और उनकी दर्दभरी चीख-पुकारें चश्मदीदों को रुला रही थीं। वो सहायता के लिए आगे बढ़ना चाहते थे, लेकिन असहज थे। आग की लपटों ने पूरे होटल को अपने कब्जे में लिया हुआ था। निहत्थे मददगार चाहकर भी कुछ नहीं कर सके।
करीब घंटे-डेढ़ घंटे बाद फायरब्रिगेड, स्थानीय पुलिस व अन्य बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे और तत्काल प्रभाव से मोर्चा संभाला, लेकिन शायद तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आग ने होटल के सभी कमरों को अपने आगोश में ले लिया था। आग इतनी तेजी से भड़क उठी थी, जिसमें बचावकर्मी भी फंस गए। करीब आठ-दस बचावकर्मी भी आग से झुलस गए, जिनका उपचार विभिन्न अस्पतालों में जारी है।
दिल्ली में लगातार होते अग्निकांड के कुछ वाजिब कारण हैं, जिसे हुकूमत अच्छे से जानती है। अव्वल तो, महानगरों में अनियोजित अवैध निर्माण, जो हादसों को चौबीसों घंटे न्योता देते हैं, वहीं जिस होटल में आग लगी, उसमें कमरों को बनाने की इजाजत मात्र छह कमरों की थी, लेकिन 25 कमरे बने हुए थे। चार मंजिला परमिशन के बाद सात मंजिला बनाया हुआ था। पूरे होटल में एक भी रेस्क्यू उपाय नहीं था। बिजली का अतिरिक्त लोड था। पूरे होटल की इमारत घूसखोरी के दम पर टिकी थी। सभी विभागों ने नियमों को ताख पर रखा हुआ था। स्थानीय सफेदपोश और लोकल प्रशासन भी अंजान नहीं थे।
दिल्ली फायर सर्विस के आंकड़ों की मानें, तो दिल्ली में इस वर्ष जनवरी में छोटी-बड़ी करीब 1,396 घटनाएं रिपोर्ट हुईं। वहीं, फरवरी में 1,096, मार्च में 1,538 और अप्रैल में बढ़कर ये आंकड़ा 2,663 तक जा पहुंचा। विवेक विहार में ‘चाइल्ड केयर अस्पताल’ की घटना को याद करके आज भी रोगटे खड़े हो जाते हैं, जहां अचानक लगी आग से उपचाराधीन कई दर्जन नवजात बच्चे जलकर मर जाते हैं। उस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। ऐसी ही एक घटना दो साल पहले 26 जनवरी को मानसरोवर पार्क में हुई थी, जिसमें चार लोग जलकर मरे थे।
कुल मिलाकर इन सभी दर्दनाक घटनाओं से शासन-प्रशासन ने कोई सीख नहीं ली? दिल्ली में अग्निकांड की एक घटना घटती है, तो दूसरी घटना की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। हादसे की जांचों का खेल भी बड़ा निराला है। जब तक शोर मीडिया और आम लोगों की चर्चाओं में रहता है, जांच के नाम पर डंडा खूब फटकारा जाता है। थोड़े समय बाद सबकुछ शांत हो जाता है। मालवीय नगर घटना की भी जांच होगी कुछ दिन, सील किया जाएगा होटल, एकाध गिरफ्तारियां भी होंगी। अवैध निर्माण का हवाला देकर तोड़फोड़ होगी, बुलडोजर भी इलाके में कुछ दिनों तक हूं-हूं करेगा। अंत में प्रशासन फिर किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठ रहेगा। इस हादसे में कई लोग ऐसे भी हैं, जो अपने घरों में इकलौते कमाने वाले थे। उनकी तो दुनिया ही लुट गई। किसी ने अपना पति खोया, तो किसी ने अपना पिता? क्या इस कमी की भरपाई कोई कर पाएगा? शायद नहीं!
दिल्ली में आग की घटनाओं से पिछले पांच सालों में 2022-2026 जून तक 302 लोगों की मौतें हुईं। पिछले दो सालों में अग्निकांड की घटनाएं दिल्ली में दूसरे राज्यों के मुकाबले सर्वाधिक बढ़ी हैं। अफसोस इस बात का है कि घटनाओं को रोकने और बचाव के इंतजामों में कोई तरक्की नहीं हुई। मई-जून के महीनों में आग लगने की घटनाएं ज्यादा होती हैं, क्योंकि इन दिनों अतिरिक्त उर्जा लोड बढ़ने से बिजली के तारों से र्शाटसर्किट होना आम होता है। ये सब जानते हुए भी होटल और व्यवसायिक प्रतिष्ठान वाले कोई व्यवस्था अपने यहां नहीं करते। फायर ब्रिगेड भी रामभरोसे हैं, उनकी भी तैयारियां पुरानी और बेजार हैं, जबकि उसे आधुनिक किए जाने की जरूरत है।
