मलयालम सिनेमा का एक स्वर्णिम युग समाप्त: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता सलीम कुमार का 56 वर्ष की आयु में निधन
कोच्चिः राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता मलयालम अभिनेता सलीम कुमार का निमोनिया के इलाज के दौरान यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 56 वर्ष के थे। केरल में मिमिक्री कलाकार के रूप में अपनी शुरुआत करने वाले कुमार मलयालम सिनेमा के सबसे बहुमुखी कलाकारों में से एक बने। सूत्रों ने बताया कि शनिवार रात करीब 10.43 बजे उनका निधन हुआ। कुछ साल पहले लिवर प्रतिरोपण करवा चुके अभिनेता को शनिवार सुबह अस्पताल में भर्ती कराया गया और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। परिवार के सूत्रों के अनुसार, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने आखिरी सांस ली।
'मिमिक्री' आर्टिस्ट के रूप में थे मशहूर
मलयालम सिनेमा में जाना-पहचाना चेहरा रहे कुमार ने 1990 के दशक के आखिर में फिल्मी जगत में कदम रखने से पहले 'मिमिक्री' और हास्य के माध्यम से पहचान हासिल की। उन्होंने 1997 में फिल्म जगत में पदार्पण किया लेकिन 2000 के दशक में उनके हास्य अभिनय ने उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई। फिल्म उद्योग में आने से पहले कुमार केरल के मिमिक्री जगत में एक प्रमुख हस्ती थे। उन्होंने केरल के 'कलाभवन' के साथ राज्य और विदेशों में कई कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया और बाद में अपना खुद का 'मिमिक्री ग्रुप' बनाया। वह थिएटर में भी सक्रिय थे और मलयालम टेलीविजन चैनलों पर कॉमेडी कार्यक्रमों की मेजबानी करते थे।
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'इष्टमनु नूरु वट्टम' से की फिल्म जगत में एंट्री
सलीम कुमार ने 1997 में सिद्दीक-शमीर द्वारा निर्देशित फिल्म 'इष्टमनु नूरु वट्टम' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। उन्हें प्रमुख सफलता 'सत्यमेव जयते' से मिली जिसने उन्हें मलयालम सिनेमा के अग्रणी हास्य कलाकारों में से एक के रूप में स्थापित किया। कई सफल फिल्मों में हास्य भूमिकाएं निभाने के बाद कुमार ने गंभीर किरदारों को निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। निर्देशक कमल की फिल्म 'पेरुमाझक्कलम' (2004) में उनके शानदार अभिनय ने उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया।
उन्होंने 'अचनुरंगथा वीडू' में अपने अभिनय के लिए केरल राज्य फिल्म पुरस्कार में द्वितीय सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता और बाद में 'अदामिंते मकान अबू' (2010) में उनके प्रशंसित अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और केरल राज्य फिल्म पुरस्कार दोनों प्रदान किए गए। अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए मशहूर कुमार ने लगभग तीन दशकों के अपने करियर में हास्य से लेकर गंभीर चरित्र भूमिकाएं निभाईं और 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। उनकी आखिरी फिल्म 2025 में रिलीज़ हुई 'भा भा बा' थी जिसमें वह मेहमान भूमिका में नजर आए थे। कुमार ने लेखक और निर्देशक के रूप में भी फिल्म निर्माण में कदम रखा। फिल्म उद्योग में अपार लोकप्रियता के बावजूद कुमार ने कभी अपने राजनीतिक झुकाव को नहीं छिपाया और खुले तौर पर खुद को कांग्रेस पार्टी का समर्थक बताया। कोच्चि के महाराजा कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह छात्र इकाई केरल छात्र संघ (केएसयू) के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे और कला क्लब के सचिव के रूप में कार्य किया।
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कुमार अक्सर अपने पिता की कांग्रेस के प्रति गहरी प्रतिबद्धता के बारे में बात किया करते थे और अक्सर यही कहा करते थे कि वह छोटी उम्र से ही पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं। हाल में हुए केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कुमार ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) का खुले तौर पर समर्थन किया। वह कई मौकों पर गठबंधन के नेताओं के साथ दिखाई दिए और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के नेतृत्व की आलोचना की। केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने कुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें ''सिर्फ एक फिल्मी सितारे से कहीं बढ़कर भाई और परिवार का सदस्य'' बताया।
नेताओं ने जताया शोक
मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा, ''सलीम कुमार उत्तर परवूर का गौरव थे। गरीबी और कठिनाइयों का सामना करने वाले एक साधारण परिवार में जन्मे सलीम कुमार ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर भारतीय सिनेमा के शिखर को छुआ।'' सतीशन ने इस बात का भी जिक्र किया कि कुमार आखिरी बार कुछ दिन पहले परवूर के लोगों द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। फिल्म जगत और राजनीति से जुड़े लोगों ने अभिनेता के निधन पर शोक व्यक्त किया।
अभिनेता ममूटी ने 'फेसबुक' पर लिखा, ''सलीम, आप हंसते थे और दूसरों को हंसाते थे। आप गहराई से सोचते थे और दूसरों को सोचने पर मजबूर करते थे। जब आप रोते थे तो दूसरों की आंखें भी नम हो जाया करती थीं। लेकिन अब, आप हमें रोता हुआ छोड़कर चले गए। आपका जाना एक अंतहीन दुख बन गया है, भाई।''
अभिनेता और कांग्रेस विधायक रमेश पिशारोडी ने 'फेसबुक' पर उनके मिमिक्री के दिनों की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, ''मार्गदर्शन करने वाली रोशनी बुझ गई।'' अभिनेत्री मंजू वारियर ने भी कुमार की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, ''एक अभिनेता अमर होता है।''
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पर्यटन, फिल्म और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री पीसी विष्णुनाथ ने सलीम कुमार को एक महान अभिनेता बताया और कहा कि उन्होंने ईमानदारी और मानवता के साथ मानवीय जीवन के कई पहलुओं को चित्रित किया। मंत्री ने कहा, ''सलीम कुमार एक कलाकार के सच्चे कर्तव्य को पूरा करने के बाद हमें छोड़कर चले गए, जिन्होंने लोगों को भरपूर हंसाया और उन्हें सोचने पर मजबूर किया।'' विष्णुनाथ ने अस्पताल जाकर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी।
केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने भी अस्पताल जाकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कुमार को जीवनपर्यंत कांग्रेस समर्थक और घनिष्ठ मित्र के रूप में याद किया, जिनके हास्य, स्नेह और राजनीतिक दृढ़ विश्वास ने उनके आसपास के सभी लोगों पर अमिट छाप छोड़ी। उनके पार्थिव शरीर को बाद में आम लोगों के दर्शन के लिए नॉर्थ परवूर टाउन हॉल लाया गया। उनका अंतिम संस्कार आज शाम नॉर्थ परवूर स्थित उनके आवास 'लाफिंग विला' में पुलिस सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके परिवार में उनकी पत्नी सुनीता और दो बेटे चंदू और आरोमल हैं। चंदू ने मलयालम की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'मंजुम्मेल बॉयज' में अभिनय किया था।
