नए क्षितिज पर यूपी की अर्थव्यवस्था
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश ने 2,01,241 करोड़ रुपये का निर्यात किया है।
वैश्विक मंदी और युद्ध के माहौल में भी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था उड़ान पर है। यह पहली बार हुआ है कि उत्तर प्रदेश का निर्यात दो लाख करोड़ के पार पहुंचा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश ने 2,01,241 करोड़ रुपये का निर्यात किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 1,86,059 करोड़ रुपये रहा।
इस उपलब्धि ने उत्तर प्रदेश को देश के टॉप पांच निर्यातक राज्यों की कतार में खड़ा कर दिया है। गौर करें तो भारत से होने वाले कुल निर्यात में अकेले यूपी की हिस्सेदारी 5.2 फीसदी है। इस दरमियान भारत ने कुल 39,04,000 करोड़ रुपये का निर्यात किया है। आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक निर्यात अमेरिका को हुआ है। इसके बाद यूके, यूएई, जर्मनी और नेपाल को निर्यात किया गया है। उत्तर प्रदेश से निर्यात में सबसे अधिक गौतमबुद्धनगर (नोएडा) से 48 फीसदी (97,703 करोड़ रुपये) निर्यात हुआ है। इसी तरह गाजियाबाद से 18,728 करोड़, कानपुर नगर से 10,823 करोड़ और मुरादाबाद से 10,639 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है।
उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि इस मायने में ज्यादा महत्वपूर्ण है कि देश के शीर्ष पांच निर्यातक राज्यों में एकमात्र राज्य उत्तर प्रदेश ही है, जिसके पास समुद्र तट नहीं है। एक कृषि राज्य होने के बावजूद भी यूपी ने निर्यात क्षेत्र में ऊंची छलांग लगाई है। गौर करें तो एक कृषि प्रधान राज्य में कामकाज के मूल्यांकन का आधार कृषि, किसानों की दशा एवं वानिकी के साथ-साथ राज्य का विकास दर, कानून-व्यवस्था, उद्योग-धंधे, कल-कारखाने और सामाजिक समरसता ही होता है। इस कसौटी को आधार बनाएं तो यूपी की मौजूदा सरकार शानदार काम कर रही है।
वर्ष 2017 में सत्ता की लगाम थामते ही सरकार ने कैबिनेट की पहली बैठक में लघु एवं सीमांत किसानों के एक लाख रुपये तक का फसली ऋण माफ किया। इस निर्णय से 2.15 करोड़ किसान लाभान्वित हुए। सरकार ने विगत नौ वर्षों में गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये का भुगतान कर उनके चेहरे पर खुशियां ला दी हैं। गौर करें तो यह 1994 से 2016 यानी 22 वर्षों में हुए कुल भुगतान से भी 90 हजार करोड़ रुपये अधिक है।
सफल कृषि नीति से राज्य में कुल सिंचित क्षेत्र 133 लाख हेक्टेअर तक पहुंच गया है। इसी तरह अनाज उत्पादन में भी 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गौर करें तो उत्तर प्रदेश की कृषि सूखा, बाढ़ और ओले के प्रहार से बर्बाद होती रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने किसानों को फसल बीमा योजना से आच्छादित किया है। इसके दायरे में बंटाईदारों को भी लाया है। सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत किसानों को दिए जाने वाले हर चौथे महीने दो हजार रुपये का भुगतान को भी सुनिश्चित किया है। इससे किसानों को बड़ी राहत मिली है।
कृषि को मजबूती देने के लिए सरकार ने गोवंश की रक्षा के लिए कानून बनाए हैं और अवैध बूचड़खानों को बंद कराया है। एक कृषि प्रधान राज्य के विकास के लिए कृषि के उत्थान के साथ-साथ उद्योग-धंधे और कल-कारखानों का विकास होना आवश्यक है। इस दिशा में सरकार ने 2018 में प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया। आंकड़ों पर गौर करें तो विगत आठ वर्षों में राज्य में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। ‘ईज ऑफ डूइंग’ बिजनेस से उद्योगों एवं कल-कारखानों को नई संजीवनी मिली है। विश्व बैंक की कारोबारी सुगमता रैकिंग में उत्तर प्रदेश 2017 में 14वें स्थान पर था, जो आज दूसरे स्थान पर है।
सरकार ने राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक निवेश एवं रोजगार संवर्धन नीति-2017 लागू की, जिसके परिणामस्वरुप निवेशकों को कर में छूट एवं सब्सिडी तथा जमीन आवंटन में मदद मिली है। सरकार ने राज्य में 33 सेक्टोरल पॉलिसी को धार दी है, जिससे उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास का नया धूमकेतु बनकर उभरा है। सरकार की ठोस पहल के कारण डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल फॉर्मा सेक्टर को पंख लगा है। नोएडा के बाद बीडा के रूप में उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त इलाके बुंदेलखंड में नया औद्योगिक शहर बसाया जा रहा है।
बुंदेलखंड में ड्रग व फार्मा की स्थापना का काम तेजी पर है। बुंदेलखंड में रक्षा औद्योगिक गलियारा का काम भी तेजी पर है, जो कि न सिर्फ इस इलाके को दुनिया के नक्शे पर लाएगा, बल्कि इसके जरिए मेक इन इंडिया अभियान को भी प्रोत्साहन मिलेगा। करीब पांच हजार हेक्टेयर में यह गलियारा छह शहरों लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट में विकसित होगा। योगी सरकार ने इसमें रक्षा से जुड़े उद्योग लगाने वाले निवेशकों को विशेष रियायत देने की पेशकश की है। अच्छी बात यह है कि पांच दर्जन से अधिक कंपनियों ने रक्षा औद्योगिक गलियारा में निवेश करने के लिए अभिरुचि दिखाई है। बुंदेलखंड के विकास के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का निर्माण किया है। (ये लेखन के निजी विचार हैं)
