केजीएमयू न्यूज़ : दवा घोटाले में एक और डॉक्टर पर गिरेगी गाज, फेफड़ों के रोगों की होगी सटीक पहचान; दवाओं का कबाड़खाना, लाखों की दवाएं खुले में फेंकी गईं

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Published By Anjali Singh
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-मृत मरीजों के नाम पर दवाओं की मांग और बिलों पर हस्ताक्षर को लेकर नोडल अधिकारी से फिर होगी पूछताछ - इस तकनीक को शुरू करने वाला केजीएमयू का चेस्ट मेडिसिन विभाग प्रदेश का पहला विभाग बन गया है -वितरण के बजाय एक्सपायरी के हवाले की गईं दवाएं, सरकारी धन की बर्बादी पर जांच के आदेश

लखनऊ, अमृत विचार : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के यूरोलॉजी विभाग में करोड़ों रुपये के दवा घोटाले में सोमवार को एक और डॉक्टर पर गाज गिर सकती है। जांच समिति ने शनिवार को विभाग के दवा नोडल अधिकारी डॉ. विवेक सिंह से घंटों पूछताछ की थी। पूछताछ का केंद्र वे इंडेंट और बिल रहे, जिन पर ऐसे मरीजों के नाम दर्ज थे, जिनकी मौत पहले ही हो चुकी थी। समिति ने सवाल किया कि मृत मरीजों के नाम पर दवाओं की मांग कैसे जारी हुई और उन दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर किस आधार पर किए गए। 

सूत्रों के मुताबिक, डॉ. विवेक सिंह इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जांच समिति के अध्यक्ष डॉ. केके सिंह ने बताया कि सोमवार को डॉ. विवेक सिंह से दोबारा पूछताछ की जाएगी। यदि वे संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है। जांच में अब तक सामने आया है कि यूरोलॉजी विभाग में कई ऐसे मरीजों के नाम पर दवाओं का इंडेंट जारी किया गया, जिनकी मृत्यु पहले ही हो चुकी थी। रिकॉर्ड में उन्हें भर्ती दिखाकर दवाएं मंगाई गईं और संबंधित बिल भी तैयार किए गए। इतना ही नहीं, इन दस्तावेजों पर विभागीय अधिकारियों के हस्ताक्षर भी पाए गए हैं।

दवाएं आखिर गईं कहां

जांच समिति अब इस बात की तह तक पहुंचने में जुटी है कि मृत मरीजों के नाम पर मंगाई गई दवाओं का वास्तविक उपयोग कहां हुआ और उन्हें किस तरह खपाया गया। समिति ने रिकॉर्ड की जांच के दौरान ऐसे कई संदिग्ध मामलों की पहचान की है, जिनमें प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

अंतरिम रिपोर्ट सौंपी, जांच अंतिम चरण में

डॉ. केके सिंह ने बताया कि मामले से संबंधित अंतरिम रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी गई है, हालांकि कई बिंदुओं की जांच अभी जारी है। सोमवार को जांच पूरी करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समिति सभी दस्तावेजों और तथ्यों की गहन पड़ताल कर रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

केजीएमयू में अत्याधुनिक तकनीक से फेफड़ों के रोगों की होगी सटीक पहचान

केजीएमयू के चेस्ट मेडिसिन विभाग ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों की जांच गाइडेड रेडियल एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (ईबीयूएस) तकनीक से शुरू कर दी है। ये सुविधा देने वाला चेस्ट मेडिसिन विभाग प्रदेश का पहला विभाग बन गया है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) चेस्ट मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि यह उपलब्धि केवल एक नई तकनीक की शुरुआत नहीं, बल्कि बेहतर मरीज सेवाओं और सटीक उपचार के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक के जरिए फेफड़ों की बीमारियों का निदान पहले की तुलना में अधिक सटीक और प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

विभाग के डॉ. दर्शन बजाज ने बताया कि सी-आर्म गाइडेड रेडियल ईबीयूएस तकनीक फेफड़ों के भीतर मौजूद छोटी, गहराई में स्थित गांठों और संदिग्ध घावों की सटीक पहचान करने में सक्षम है। इसके माध्यम से बायोप्सी भी अधिक सटीकता से की जा सकती है, जिससे मरीजों को समय पर सही निदान और उपचार की दिशा तय करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में विकिरण (रेडिएशन) का उपयोग होता है, जिसके चलते सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। विभाग द्वारा सभी आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है।

भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए थायरॉयड शील्ड, विशेष हेडगियर सहित अन्य उन्नत सुरक्षा उपकरण भी शामिल किए जाएंगे। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक फेफड़ों के कैंसर समेत कई गंभीर फेफड़ा रोगों की शुरुआती और सटीक पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे मरीजों को कम समय में बेहतर जांच और उपचार की सुविधा मिल सकेगी।

केजीएमयू में दवाओं का कबाड़खाना, लाखों की दवाएं खुले में फेंकी गईं

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केजीएमयू में मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली लाखों रुपये की दवाएं लिंब सेंटर स्थित एचआरएफ स्टोर के बाहर फेंक दी गईं। करीब पांच लाख रुपये मूल्य की इन दवाओं में कई ऐसी हैं, जिनकी एक्सपायरी डेट इसी महीने पूरी हो जाएगी। एक इंजेक्शन की कीमत 1800 और विटामिन की 15 टेबलेट की कीमत 1200 रुपये के करीब है।

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के लिंब सेंटर में हाल ही में एचआरएफ का नया स्टोर बनाया गया है। इस स्टोर के बाहर बड़ी मात्रा में इंजेक्शन, विटामिन और पोषण संबंधी दवाएं पड़ी मिलीं। इन दवाओं को न तो सुरक्षित तरीके से रखा गया और न ही निस्तारण के लिए निर्धारित मानकों का पालन किया गया।

सूत्रों के अनुसार एचआरएफ और संबंधित चिकित्सकों के बीच समन्वय के अभाव में दवाओं का समय पर उपयोग नहीं किया जा सका। इससे बड़ी मात्रा में दवाएं एक्सपायरी होने के करीब पहुंच गईं हैं। आरोप है कि वितरण की व्यवस्था करने के बजाय दवाओं को स्टोर से बाहर कर दिया गया, जिससे लाखों रुपये का सरकारी धन बर्बाद हो गया। एक ओर मरीजों को कई बार जरूरी दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्टोर में रखी दवाएं बिना उपयोग के नष्ट हो रही हैं।

केजीएमयू प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ये दवा स्टोर के बाहर फेंकी गई

- क्यूओग्रेस कैप्सूल्स बैच नंबर- पीकेएनएचएम- 11 उत्पादन तिथि जुलाई 2024, एक्सपायर तिथि जून 2026

-अमीनो एसिड इंजेक्शन बैच एलपी 2405 उत्पादन तिथि अगस्त 2024 एक्सपायर जून 2026

-क्लोटिन इंजेक्शन बैच वी 627104,उत्पादन तिथि जुलाई 2024 एक्सपायर तिथि जून 2026

-मैग्टम नोवो इंजेक्शन बैच- बैच24180529, उत्पादन तिथि जून 2024, समाप्ति तिथि जून 2026

-नोक्साविट-10 बैच एएमटी-6399

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