Bareilly News: हजारों की नसबंदी, फिर भी शहर में बेहिसाब बढ़े आवारा कुत्ते

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Published By Monis Khan
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पांच साल में 11,864 कुत्तों की नसबंदी का दावा कर रहा नगर निगम

स्मार्ट सिटी में गली-गली आवारा कुत्तों के झुंड नागरिकों की निकलना दूभर कर रहे हैं। हिंसक कुत्ते इंसानों पर हमले बोल रहे हैं। बच्चों को नोंच रहे हैं। कुछ की जान भी ले चुके हैं। कुत्ता नियंत्रण के नाम पर नगर निगम एक करोड़ से अधिक रकम फूंक चुका है। 11,864 कुत्तों की नसबंदी के भी दावे हैं मगर कुत्तों की संख्या कम होने की जगह विस्फोट की तरह बढ़ती ही जा रही है।

बरेली, अमृत विचार। स्मार्ट सिटी में गली-गली आवारा कुत्तों के झुंड नागरिकों की निकलना दूभर कर रहे हैं। हिंसक कुत्ते इंसानों पर हमले बोल रहे हैं। बच्चों को नोंच रहे हैं। कुछ की जान भी ले चुके हैं। कुत्ता नियंत्रण के नाम पर नगर निगम एक करोड़ से अधिक रकम फूंक चुका है। 11,864 कुत्तों की नसबंदी के भी दावे हैं मगर कुत्तों की संख्या कम होने की जगह विस्फोट की तरह बढ़ती ही जा रही है।

बुजुर्ग महिला और बच्ची की हुई थी मौत
नगर निगम की ओर से प्रति कुत्ता 917 रुपये का भुगतान पाने वाली पीलीभीत की कार्यदायी संस्था सोसाइटी फार ह्यूमन एंड एनीमल वेलफेयर की कार्यप्रणाली भी गंभीर सवालों के घेरे में है। कारण यह है कि शहर का कोई ऐसा वार्ड नहीं है, जहां आवारा कुत्तों का उत्पात न हो। राहगीर लगातार इनका शिकार बन रहे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आ रहे 200 से अधिक मरीज इस बदहाली की गवाही दे रहे हैं। बीते दिनों कर्मचारी नगर में कुत्तों के हमले से सेवानिवृत्त शिक्षका की मौत और सीबीगंज में मासूम बच्ची पर हुआ जानलेवा हमला निगम की घोर उदासीनता का नतीजा है। इधर, नगर निगम का पशु चिकित्सा विभाग, हर वर्ष सिर्फ दो से ढाई हजार कुत्तों के बंध्याकरण की संख्या को कम मान रहा और इसमें तेजी लाने पर ही जनसंख्या में नियंत्रण होने की संभावना व्यक्त की है।

15 लाख की आबादी पर 45 हजार कुत्तों का अनुमान
नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण विभाग के अनुसार, मानव आबादी का तीन प्रतिशत आवारा कुत्ते समाज में पाए जाते हैं। इस आधार पर शहर की 15 लाख की आबादी पर करीब 45 हजार आवारा कुत्तों की संख्या का अनुमान है। फिलहाल, नदौसी स्थित श्वान बधियाकरण केंद्र की क्षमता मात्र 50 कुत्तों की होने के कारण हर महीने केवल 150 से 200 कुत्तों का ही बंध्याकरण हो पा रहा है। इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए 1.60 करोड़ रुपये की लागत से 200 की क्षमता वाली दूसरी ''एनिमल बर्थ केयर यूनिट'' तैयार की गई है। हालांकि, चयनित एजेंसी की मनमानी के कारण इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है, जिससे कुत्तों के नियंत्रण में बाधा आ रही है।

सीबीगंज में सबसे ज्यादा आतंक, दो बच्चों की गई थी जान
शहर के सीबीगंज क्षेत्र में आवारा और हिंसक कुत्तों का आतंक चरम पर है। बीते वर्ष बंडिया और मथुरापुर सहित अन्य इलाकों में 15 से अधिक बड़ी घटनाएं हुईं। इन हमलों में दो मासूम बच्चों की जान भी जा चुकी है। ये कुत्ते राह चलते लोगों और वाहन सवारों को लगातार निशाना बना रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर निगम की टीम जब भी कुत्तों को पकड़ने आती है, तो वे पास के जंगलों में भाग जाते हैं, जिससे इन पर नियंत्रण नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर, निगम अधिकारियों का दावा है कि स्थिति को संभालने के लिए बीते वर्ष इस क्षेत्र से 120 से अधिक कुत्तों को पकड़कर बंध्याकरण के लिए भेजा गया था।

-वर्ष-वार आवारा कुत्तों का किया गया बधियाकरण

वित्तीय वर्ष-पकड़े गए कुत्तों की संख्या

वर्ष-2021 से 2022- 2488

वर्ष-2022 से 2023-1745

वर्ष-2023 से 2024-2233

वर्ष-2024 से 2025-2008

वर्ष-2025 से 2026-2934

वर्ष-2026 से 2027 (सात जून-2026तक)- 456

पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डा. हरपाल सिंह ने बताया कि जनता की शिकायतों को प्राथमिकता देते हुए प्रभावित इलाकों में तुरंत टीमें भेजी जाती हैं, जिससे नियमित रोस्टर का काम थोड़ा प्रभावित होता है। हालांकि, आवारा कुत्तों की समस्या पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए नदौसी में तैयारी एबीसी सेंटर के लिए जल्द नई एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसके शुरू होते ही बधियाकरण अभियान में भारी तेजी आएगी।

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