शिमला समर फेस्टिवल  : संस्कृति, संगीत और रंगों का अनूठा संगम

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Published By Anjali Singh
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जब उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में गर्मी अपने चरम पर होती है, तब हिमालय की वादियों में बसा शिमला एक अलग ही रंग में नजर आता है। ठंडी हवाओं, हरे-भरे पहाड़ों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच यहां शुरू होने वाला इंटरनेशनल शिमला समर फेस्टिवल पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है। 8 से शुरू हुए और 12 जून तक आयोजित होने वाला यह महोत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की विविधता, लोक परंपराओं और हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भव्य उत्सव है। देश-विदेश से आने वाले हजारों पर्यटक यहां लोककला, संगीत, नृत्य और पारंपरिक व्यंजनों का अनूठा अनुभव प्राप्त करते हैं।

छह दशक से अधिक पुरानी परंपरा

इंटरनेशनल शिमला समर फेस्टिवल हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजनों में गिना जाता है। वर्ष 1960 में शुरू हुए इस महोत्सव का उद्देश्य राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय संस्कृति को व्यापक मंच प्रदान करना था। समय के साथ यह आयोजन न केवल हिमाचल बल्कि पूरे उत्तर भारत के प्रमुख ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल हो गया।

शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान और माल रोड पर आयोजित होने वाला यह पांच दिवसीय महोत्सव हर साल हजारों पर्यटकों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों को आकर्षित करता है। बदलते समय के साथ इसकी भव्यता और लोकप्रियता लगातार बढ़ी है, लेकिन इसकी मूल भावना आज भी भारतीय लोक संस्कृति को सम्मान देने की ही है।

एक मंच पर दिखेगा भारत का सांस्कृतिक वैभव

शिमला समर फेस्टिवल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सांस्कृतिक विविधता है। यहां केवल हिमाचली लोककलाएं ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों की सांस्कृतिक परंपराएं भी देखने को मिलती हैं। इस बार उत्तराखंड का प्रसिद्ध छोलिया नृत्य, जम्मू-कश्मीर का गोजरी नृत्य, राजस्थान के भवई और घूमर नृत्य के अलावा तिब्बती सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दर्शकों को आकर्षित करेंगी। यह आयोजन भारत की ‘एकता में अनेकता’ की भावना को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है। विभिन्न राज्यों के कलाकार अपनी परंपराओं, वेशभूषा, संगीत और लोकनृत्यों के माध्यम से दर्शकों को देश की सांस्कृतिक समृद्धि से परिचित कराते हैं।

महानाटी होगी आकर्षण का केंद्र

हिमाचल प्रदेश की पहचान मानी जाने वाली नाटी और महानाटी इस उत्सव की प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। नाटी केवल एक लोकनृत्य नहीं, बल्कि पहाड़ी समाज की सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक जीवन का प्रतीक है। जब सैकड़ों कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में एक साथ नृत्य करते हैं, तो रिज मैदान का दृश्य किसी जीवंत लोकचित्र जैसा प्रतीत होता है। यही कारण है कि हर वर्ष हजारों पर्यटक इस अनूठे सांस्कृतिक अनुभव को देखने के लिए शिमला पहुंचते हैं।

स्थानीय कलाकारों को मिलेगा बड़ा मंच

समर फेस्टिवल केवल स्थापित कलाकारों तक सीमित नहीं रहता। आयोजकों के अनुसार इस वर्ष भी लोकप्रिय गायकों और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रतिदिन शाम को आयोजित की जाएंगी। साथ ही युवा और उभरती प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया जाएगा। इस पहल से स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में सहायता मिलेगी। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को संबल

यह महोत्सव सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। फेस्टिवल के दौरान शिमला के होटल, रेस्तरां, टैक्सी सेवाएं, हस्तशिल्प बाजार और छोटे व्यवसायों में गतिविधियां बढ़ जाती हैं। विशेष रूप से प्रसिद्ध लक्कड़ बाजार में पर्यटकों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है। यहां मिलने वाले हस्तनिर्मित लकड़ी के उत्पाद, ऊनी वस्त्र और स्थानीय शॉल पर्यटकों के बीच खासे लोकप्रिय रहते हैं। इससे स्थानीय कारोबारियों और कारीगरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।

स्वाद और संस्कृति का अनूठा मेल

शिमला समर फेस्टिवल का फूड फेस्टिवल भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहता है। यहां आने वाले पर्यटकों को हिमाचल के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलता है। सिड्डू, मदरा, बबरू और धाम जैसे पारंपरिक व्यंजन न केवल हिमाचली खानपान की पहचान हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा हैं। भोजन के माध्यम से पर्यटक हिमाचल की जीवनशैली और परंपराओं को करीब से समझ पाते हैं।

सांस्कृतिक संरक्षण की मजबूत पहल

तेजी से बदलती जीवनशैली और डिजिटल मनोरंजन के दौर में ऐसे आयोजन सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिमला समर फेस्टिवल लोकनृत्य, लोकसंगीत और क्षेत्रीय कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। ब्रिटिश काल से सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र रहे रिज मैदान में जब शाम ढलते ही रोशनी जगमगाने लगती है और लोकसंगीत की धुनें गूंजती हैं, तब पूरा वातावरण उत्सवमय हो उठता है। यही दृश्य इस आयोजन को खास बनाता है।

इस बार क्या रहेगा खास

इस वर्ष के इंटरनेशनल शिमला समर फेस्टिवल में लोकनृत्य और संगीत प्रस्तुतियों के साथ कला प्रदर्शनियां, फ्लावर शो, फूड फेस्टिवल, ट्रेडिशनल माउंटेनियरिंग गतिविधियां, फैशन शो और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अलावा पहली बार ‘राइड ऑफ सेवन हिल्स’ नामक हेलीकॉप्टर जॉय राइड भी शामिल की गई है। इसके माध्यम से पर्यटक शिमला की सात प्रमुख पहाड़ियों का हवाई दृश्य देख सकेंगे। यह नई पहल निश्चित रूप से पर्यटकों के अनुभव को और अधिक रोमांचक बनाएगी।