राजघाट से शांतिवन सर्वधर्म प्रार्थना सभा 

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Published By Anjali Singh
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भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर 27 मई को सुबह उनकी समाधि शांतिवन में सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इससे पहले ही वहां विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु, विद्वान और श्रद्धालु वहां पहुंचने लगे थे। इनमें अधिकांश वे चेहरे थे, जो गांधी समाधि राजघाट पर 2 अक्टूबर और 30 जनवरी को भी नियमित रूप से दिखाई देते हैं। ये सभी अपने-अपने धर्मों की पवित्र पुस्तकों से प्रार्थना के दौरान पाठ करते हैं।

गत दो-ढाई दशकों से शांतिवन और राजघाट पर बाइबल का पाठ करने वाले जॉर्ज सोलोमन तुर्कमान गेट स्थित ट्रिनिटी चर्च में पादरी हैं। वे दिल्ली और हरियाणा के सोनीपत में सेंट स्टीफंस कैंब्रिज स्कूल की प्रबंधन समिति से भी जुड़े हैं। वे कहते हैं, “भारत में सरकारी स्तर पर सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि यह देश सबका है। बाइबल भी प्रेम और भाईचारे का संदेश देती है।”

ये चेहरे वास्तव में भारत की आत्मा हैं, जहें विविधता में एकता जीवित है। सर्वधर्म प्रार्थना सभाएं हमें बार-बार याद दिलाती हैं कि गांधीजी का सपनों का भारत सबका है, जिसमें हर धर्म को सम्मान मिलता है। मकसूद अहमद शांतिवन और राजघाट पर कुरान की आयतें पढ़ते हैं। वे पूर्व राष्ट्रपतियों केआर नारायणन, प्रणव मुखर्जी तथा प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभाओं में भी शामिल हो चुके हैं। एंग्लो अरबी स्कूल में जीव विज्ञान के शिक्षक मकसूद अहमद कहते हैं कि कुछ दिमागी रूप से असंतुलित लोग इन सभाओं की भी आलोचना करने लगे हैं।

डॉ. बलदेव आनंद सागर 2 अक्टूबर और 30 जनवरी की विशेष तिथियों पर सर्वधर्म प्रार्थना में गीता पाठ करते हैं। वे बताते हैं कि पहली बार राजघाट पर इस सभा का हिस्सा बनने पर जो अनुपम अनुभूति हुई, वह आज भी उनके मन में ताजा है। राजघाट पर वे गीता के 5-6 श्लोक पढ़ते हैं, जबकि 30 जनवरी मार्ग पर पंचदेव-सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु की प्रार्थना का पाठ करते हैं। वे मानते हैं कि सनातन परंपरा में इन सभी देवताओं की पूजा अनिवार्य है।

सर्वधर्म प्रार्थना का सुंदर विचार महात्मा गांधी ने विश्व को दिया था। उनके जीवनकाल में ही इसकी शुरुआत हुई और आज भी यह परंपरा पूरे जीवंत रूप में मौजूद है। इन सभाओं में बहाई, यहूदी, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों के पवित्र ग्रंथों का भी पाठ किया जाता है। सर्वधर्म प्रार्थना का विचार अत्यंत व्यापक और महत्वपूर्ण है। यह संदेश देता है कि भारत में अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग एक साथ बैठकर अपने धर्मग्रंथों के मुख्य संदेशों को साझा कर सकते हैं। इन सभाओं में भाग लेने वालों को 5100 रुपये का मानदेय मिलता है।

विवेक शुक्ला