काशी में मांस-मछली की दुकानें शिफ्ट होने को लेकर सियासत तेज, फैसले पर क्या बोले स्थानीय कारोबारी? जानिए
वाराणसी। यूपी की धार्मिक नगरी काशी में नगर निगम के फैसले के बाद शहर की सीमा से बाहर मीट-मांस व मछली की दुकानों को लेकर अब राजनीति गरमा गई है। वाराणसी नगर निगम ने सावन के पवित्र महीने की शुरुआत से पहले सभी मांस, मछली और पोल्ट्री की दुकानों को शहर की सीमा के बाहर स्थानांतरित करने का फैसला किया है। नगर निकाय के इस फैसले पर निवासियों, व्यापारियों और नेताओं ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है।
बुधवार को मैदागिन स्थित कांग्रेस के पार्टी कार्यालय में कांग्रेस के पार्षदों ने इस फैसले का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षद दल के नेता गुलशन अली द्वारा शनिवार को हुई सदन की बैठक में इस संबंध में कोई लिखित प्रस्ताव नहीं दिया गया था। फिर भी नगर निगम द्वारा यह प्रचारित करवाया गया कि प्रस्ताव गुलशन अली द्वारा लाया गया था, जिस पर सदन में सहमति बनी। वही पार्षदों ने मांग की कि प्रस्ताव सार्वजनिक किया जाए, यदि कोई लिखित प्रस्ताव दिया गया है तो उसे सामने लाया जाए।
सावन से पहले बाहरी इलाके में निर्दिष्ट स्थानों पर स्थानांतरित
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बुधवार को कहा कि शहर के भीतर लगभग 350 से 400 मांस, मछली और चिकन की दुकानें चल रही हैं और सावन शुरू होने से पहले उन सभी को बाहरी इलाके में निर्दिष्ट स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए पांच स्थलों रामनगर, सुजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर की पहचान की गई है। श्रीवास्तव ने कहा कि मांस व्यापारियों को हर साल सावन के दौरान काफी नुकसान होता है क्योंकि इस अवधि के दौरान शहर के भीतर दुकानें आमतौर पर बंद रहती हैं।
वाराणसी नगर निगम के फैसले पर क्या बोले स्थानीय कारोबारी
मीट-मछली व्यवसायी इस महीने में क्या करेंगे और कहाँ जाएंगे। यह बात मौखिक रूप से कही गई थी। गुलशन अली ने कहा कि उनके नाम से खबरें नगर निगम द्वारा प्रचारित करवा दी गईं, जो सरासर गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि बकरीद से पहले बकरा मंडी भी बंद करवा दी गई थी। महानगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि एक साजिश के तहत कांग्रेस पार्षद दल के नेता गुलशन अली का नाम आगे करके यह प्रचारित किया गया कि उनकी ओर से सदन में प्रस्ताव दिया गया था।
लिखित प्रस्ताव दिखाओ या कानूनी कार्रवाई झेलो
इसी के आधार पर निर्णय लिया गया कि काशी में शहर की सीमा से बाहर मीट-मांस व मछली की दुकानें स्थानांतरित की जाएंगी। राघवेंद्र चौबे ने चेतावनी दी कि एक हफ्ते के अंदर नगर निगम उस लिखित प्रस्ताव को सार्वजनिक करे, अन्यथा कांग्रेस पार्टी विधिक कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि किसी के मान-सम्मान और प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए यह सब किया गया है।
शहर के भीतर नहीं बिकेगा मांस-चिकन
गुलशन अली ने बताया कि बैठक में केवल मौखिक चर्चा हुई थी कि आगे सावन का महीना आ रहा है। ऐसे में अचानक आदेश जारी कर दिया गया कि मीट-मछली की दुकानें बंद रहेंगी। पूरे सावन महीने में ये कारोबारी क्या करेंगे। उनका परिवार कैसे चलेगा।
वाराणसी निवासी अजय शर्मा ने इस कदम का स्वागत किया और कहा कि भगवान विश्वनाथ के निवास के रूप में प्रतिष्ठित यह शहर भारत और विदेश से लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। शर्मा ने कहा, ''हम नगर निगम प्रशासन और महापौर अशोक तिवारी के फैसले का स्वागत करते हैं। काशी बाबा विश्वनाथ की नगरी है और इससे करोड़ों भक्तों की भावनाएं जुड़ी हैं।''
उन्होंने दावा किया कि दशकों तक शहर में महापौर पद पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के काबिज रहने के बावजूद पहले ऐसी कोई पहल नहीं की गई थी। शर्मा ने शराब की दुकानों को काशी क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित करने की भी मांग की और कहा कि ऐसे प्रतिष्ठान शहर के धार्मिक परिक्षेत्र में संचालित नहीं होने चाहिए। हालांकि, कई निवासियों ने प्रस्तावित स्थानांतरण पर चिंता व्यक्त की।
बंगाली टोला निवासी सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि मछली और मांस कई परिवारों के दैनिक आहार और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा, ''हमारा परिवार लगभग हर दिन मछली खाता है। मछली और मांस खरीदने के लिए नियमित रूप से शहर से बाहर यात्रा करना व्यावहारिक नहीं होगा।''
मुखर्जी ने सवाल किया कि प्रशासन मांस की दुकानों को क्यों निशाना बना रहा है जबकि शहर भर में शराब और नशे की दुकानें चल रही हैं। मंडुआडीह के निवासी अनीश सिंह ने कहा कि इस कदम से हिंदू और मुस्लिम दोनों को असुविधा होगी। उन्होंने कहा, ''मांस की खपत किसी एक समुदाय तक ही सीमित नहीं है। लोग वर्तमान में स्थानीय बाजारों से मांस खरीदते हैं, लेकिन ऐसी खरीदारी के लिए लंबी दूरी की यात्रा करना मुश्किल होगा।'' सिंह ने कहा कि इस निर्णय से उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ने के साथ-साथ ऑनलाइन मांस वितरण व्यवसायों को लाभ हो सकता है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि वाराणसी की स्वच्छता और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखना प्रत्येक निवासी की जिम्मेदारी है और उस उद्देश्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से कोई भी कदम स्वागत योग्य है। उन्होंने हालांकि कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यापारियों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। सिंह ने कहा, ''अगर मांस की दुकानों को शहर के बाहर स्थानांतरित किया जा रहा है, तो काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक चरित्र को संरक्षित करने के लिए शराब की दुकानों के लिए भी इसी तरह की नीति पर विचार किया जाना चाहिए।''
मांस व्यापारी साहिल ने कहा कि दुकानों को बाहरी इलाके में स्थानांतरित करने से व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा, ''अगर दुकानें शहर के बाहर आवंटित की जाती हैं, तो हमारी बिक्री प्रभावित होगी क्योंकि कई ग्राहक खरीदारी करने के लिए इतनी लंबी दूरी की यात्रा नहीं कर पाएंगे। हम अपने नियमित ग्राहक खो सकते हैं, जिससे हमारे व्यवसाय को नुकसान होगा।'' नगर निगम ने अभी तक स्थानांतरण प्रक्रिया की समयसीमा या वैकल्पिक स्थानों पर दुकानों के आवंटन के तौर-तरीकों की घोषणा नहीं की है।
