संपादकीय : चुनौती क्रियान्वयन की

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Published By Pradeep Kumar
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक का केंद्रीय विषय ‘समावेशी मानव विकास’ था, जिसमें शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, पोषण, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक समानता को विकास की धुरी माना गया और इस मामले में यह बैठक सफल कही जाएगी कि यह एक नियमित प्रशासनिक आयोजन न हो कर अपनी चर्चाओं के दौरान 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के इन मुद्दों को राज्यों के माध्यम से जमीन पर उतारने का प्रतिबद्ध प्रयास करती दिखी, हालांकि देश में ऐसी बैठकों में अच्छे विचारों की कमी कभी नहीं रही। केवल चर्चा से विकास का लाभ हर भारतीय तक तो नहीं पहुंच पाएगा, चुनौती उनके क्रियान्वयन की है। 

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार राज्यों के विषय हैं, जबकि संसाधन, नीतियां और वित्तीय समर्थन काफी हद तक केंद्र से आते हैं, इसलिए यदि केंद्र और राज्य मिलकर स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और जवाबदेही तय करें, तभी इन चर्चाओं का वास्तविक प्रभाव दिखाई देगा। अन्यथा यह भी अनेक संकल्पों की तरह दस्तावेजों तक सीमित रह सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों को जो पांच प्रमुख सुझाव दिए, वे व्यापक दृष्टि से दूरदर्शी प्रतीत होते हैं। इनमें जिला स्तर पर जीडीपी का आकलन, निवेश के लिए अनुपालन बोझ कम करना, एआई और डेटा सेंटर जैसे उभरते क्षेत्रों पर ध्यान देना, साइबर धोखाधड़ी एवं नशे जैसी सामाजिक चुनौतियों से निपटना तथा जल संरक्षण को प्राथमिकता देना शामिल है। इन सुझावों का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वे विकास को केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं रखते। जिला जीडीपी की अवधारणा स्थानीय विकास की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है। इससे पिछड़े जिलों की पहचान और संसाधनों का बेहतर आवंटन संभव होगा, हालांकि अधिकांश राज्यों में अभी विश्वसनीय जिला स्तरीय आर्थिक आंकड़ों का अभाव है, इसलिए यह कार्य आसान नहीं होगा। इसी प्रकार एआई और डिजिटल अर्थव्यवस्था भविष्य की जरूरत हैं, लेकिन इनके लिए कौशल, निवेश और डिजिटल अवसंरचना भी चाहिए। एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य घोषित कर चुके उत्तर प्रदेश के लिए यह बैठक जिला जीडीपी, निवेश-अनुकूल वातावरण, कौशल विकास और रोजगार सृजन की रणनीतियों के तहत नए अवसर पैदा करती हैं। प्रदेश के विशाल युवा वर्ग को एआई, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण क्षेत्र से जोड़ने में सफलता मिली तो यह राष्ट्रीय विकास का प्रमुख इंजन बन सकता है। पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड के लिए जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, पर्यटन, कौशल विकास और डिजिटल सेवाएं उसके विकास की कुंजी हैं। एआई आधारित सेवाओं, डेटा सेंटर, स्टार्टअप और स्थानीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की नीति राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है। जिला स्तर पर आर्थिक गतिविधियों के आकलन से विकास असंतुलन की पहचान भी आसान होगी। 

बेशक, ‘विकसित भारत’ केवल घोषणाओं से नहीं बनेगा। राज्यों की प्रशासनिक क्षमता, वित्तीय संसाधन, पारदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति इसकी सफलता तय करेंगे। नीति आयोग की इस बैठक की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब विकास के आंकड़े नहीं, बल्कि आम नागरिक का जीवन स्तर बदलता हुआ दिखाई दे। विकसित भारत का मार्ग दिल्ली से नहीं, जिलों, ब्लॉकों और गांवों से होकर ही गुजरेगा।