कानपुर साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ : 6 गिरफ्तार, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी
कानपुर। कानपुर नगर कमिश्नरेट पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह खुद को पुलिस, सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराता था और करोड़ों रुपये की ठगी करता था। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई शिवराजपुर थाना पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने की।
गिरोह के सदस्य फर्जी मामलों में फंसाने और गिरफ्तारी का भय दिखाकर लोगों से पैसे वसूलते थे। जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को पी-टू-पी ट्रेडिंग के जरिए यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में बदलकर उसके स्रोत को छिपाया जाता था। यह नेटवर्क पिछले लगभग तीन वर्षों से सक्रिय था और देशभर में करीब 2,500 लोगों को निशाना बनाकर 15 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है।
पुलिस ने बताया कि गिरोह द्वारा 450 से अधिक फर्जी और किराए के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था। छापेमारी के दौरान 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी पहचान अशरफ खान, सूरज कुमार, राजन कटियार, राजदीप, भीमरतन कुमार और कमल के रूप में हुई है। मौके से पांच मोबाइल फोन, एक टैबलेट, 10 बैंक पासबुक, दो चेकबुक और 12 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है।
कैसे काम करता था ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड?
गिरोह के सदस्य खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन के जरिए लोगों को डराते थे। फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता था। डर के कारण कई लोग ठगी का शिकार हो जाते थे।
देशभर में फैला था नेटवर्क
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश तक सक्रिय था। कई राज्यों में इनके खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं और नेटवर्क की गहराई से जांच जारी है।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2), 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत केस दर्ज किया है। आगे की जांच में अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी भी संभव है।
