यूपी के जिलों में सजने लगीं अलम और ताजियों की दुकानें, 17 जून से शुरू होगा मोहर्रम

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार। पुराने लखनऊ में मोहर्रम की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो गई हैं। 17 जून को पहली मोहर्रम होगी और 26 जून को यौम-ए-आशूरा मनाया जाएगा। इमामबाड़ा गुफरानमआब में पहली से 12 मोहर्रम तक होने वाली मजलिसों के मद्देनजर विशाल पंडाल बनाने का काम शुरू हो गया है। इमामबाड़ों की सफाई और पुताई का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। रौजा-ए-काजमैन में ताजिये बनाने का काम चल रहा है। घंटाघर के सामने लकड़ी के इमामबाड़े और मिम्बर बिक्री के लिए सजा दिए गये हैं। अलम और पटकों की दुकानें सज गई हैं। 

सराफा बाजार में चांदी के अलम पर पालिश का काम चल रहा है। काले कुर्ते-पाजामे खरीदने वालों की भीड़ उमड़ने लगी है। पहली मोहर्रम की शाम को बड़े इमामबाड़े से शाही जरीह का जुलूस निकाला जाएगा। हुसैनाबाद ट्रस्ट की देखरेख में निकलने वाले इस जुलूस की तैयारियां चल रही हैं। यह जुलूस बड़े इमामबाड़े से रूमी गेट और घंटाघर होता हुआ छोटे इमामबाड़े तक जाता है। कर्बला के शहीदों की याद में होने वाली मजलिसों का सिलसिला 16 जून से ही शुरू हो जाएगा। अधिकांश इमामबाड़ों को 16 जून को ही सजा दिया जाएगा। 17 जून से सभी इमामबाड़ों में सिलसिलेवार मजलिसों का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

प्रयागराज-जौनपुर में मोहर्रम को लेकर तैयारिया तेज 

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मुहर्रम को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। ऐतिहासिक बुड्ढा ताजिया इस वर्ष भी अपनी पूरी शानो-शौकत के साथ उठेगा तथा परंपरा के अनुसार उसकी मेहंदी भी निकाली जाएगी। यह निर्णय बुड्ढा ताजिया कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने बुड्ढा ताजिया और मेहंदी के आयोजन का समर्थन किया। 

वहीं, बड़ा ताजिया मुहर्रम कमेटी ने इस वर्ष बड़ा ताजिया और उससे संबंधित आलम न उठाने का फैसला किया है। कमेटी के निर्णय के अनुसार इस बार केवल इमामबाड़े में फातेहा का आयोजन किया जाएगा तथा मुहर्रम की दसवीं तारीख को ताजिया का फूल दफन किया जाएगा। मुहर्रम के मद्देनजर पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 

पुलिस आयुक्त सिटी मनीष कुमार शांडिल्य ने बताया कि सभी ताजियादारों के साथ बैठक कर उन्हें शासन की गाइडलाइन से अवगत करा दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की नई परंपरा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस प्रशासन ने जुलूसों के दौरान सड़कों पर तलवार, भाला, लाठी-डंडों सहित किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित हथियारों के प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और भड़काऊ अथवा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

पुलिस आयुक्त ने बताया कि जिन मार्गों से मुहर्रम के जुलूस पारंपरिक रूप से निकाले जाते रहे हैं, उन्हीं निर्धारित मार्गों का उपयोग किया जाएगा तथा नए मार्गों या नई परंपराओं की अनुमति नहीं होगी। जुलूसों के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुहर्रम के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने और आतिशबाजी करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। 

ध्वनि प्रदूषण के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन के अनुसार मुहर्रम के जुलूसों एवं संवेदनशील स्थलों की निगरानी ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी कैमरों और वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से की जाएगी, ताकि पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराया जा सके। सं प्रदीप
वार्ता

दूर-दूर से तुर्बत की जियारत करने आते हैं लोग  

हैदराबाद और लखनऊ के बाद शिराज-ए-हिन्द जौनपुर का स्थान मुहर्रम में आता है। यहां के विश्व प्रसिद्ध इस्लाम चौक के चेहल्लुम होता है, जहां तुर्बत की जियारत करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। शिराज-ए-हिन्द जौनपुर मरकजी मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष सैय्यद शहन्शाह हुसैन एडवोकेट ने सोमवार को 'यूनीवार्ता' को बताया कि जौनपुर की अजादारी देश में विशिष्ट स्थान रखती है, इसलिए शिराज-ए-हिन्द जौनपुर को अजादारी का मरकज कहा जाता है। उन्होंने कहा कि मुहर्रम माह का चांद दिखते ही पूरी शिया जमात के मुसलमान गमगीन हो जाते हैं, सभी लोग काला वस्त्र धारण कर लेते हैं। वहीं महिलायें अपनी चूड़ियां तोड़ देती हैं। दो माह आठ दिन तक चलने वाले मुहर्रम के दौरान जौनपुर में सौ से अधिक जुलूस निकाले जाते हैं। 

चांद दिखते ही इमाम हुसैन के गम में लोग डूब जाते हैं। उनका कहना है कि अगर आज 15 जून को चांद दिखा तो 16 जून से नहीं तो 17 जून से मुहर्रम शुरू हो जायेगा । श्री हुसैन ने बताया कि शिराज-ए-हिन्द जौनपुर में पहली मुहर्रम को मुफ्ती मुहल्ले में अंगार-ए-मातम (जलते अंगारों पर चलकर मातम करना) होता है और बाजार भुआ से जुलूस अलम निकलता है। दूसरी मुहर्रम को हमाम दरवाजा से जुलजनाह व अलम का जुलूस निकलता है। तीसरी मुहर्रम को कई जगहों पर जुलूस निकलता है। 

चार मुहर्रम को मखदमूशाह अढ़न से जुलूस जुलजनाह और तुर्बत निकलता है जो कल्लू मरहूम इमामबाड़े से होता हुआ ताड़तला ईमामबाड़ा पर जाकर समाप्त होता है। वहां एक ताबूत निकलता है जिसे जुलजनाह से मिलाया जाता है। पाँचवीं मुहर्रम को चहारसू इमामबाड़ा से जुलुस अलम निकलता है, जो कल्लू मरहूम के इमामबाड़े पर जाकर समाप्त होता है। इसके साथ ही छतरीघाट (पुरानी बाजार) ईमामबाड़े से जुलूस जुलजनाह निकलता है जो इमामबाड़ा दालान कोठियाबीर सदर इमामबाड़ा होते हुए पुनः छतरीघाट पर जाकर समाप्त होता है और नकी फाटक तथा मुफ्ती मोंहल्ला से तुर्बत और अलम निकलता है। 

उन्होंने कहा कि मोहर्रम की छठी तारीख को कटघरे से जुलूस-ए-अलम उठता है जो ओलन्दगंज, शाहीपुल, चहारसू होता हुआ हमाम दरवाजे के इमामबाड़ा पर समाप्त हेाता है। इसके साथ ही कल्लू इमामबाड़ा के पास से तुरबत निकलती है और तकरीर होती है, और तुुरबत को अलम से मिलाया जाता है। सातवीं मोहर्रम को हर मुहल्ले से जुलूस निकलता है। 

शहर के अटाला मस्जिद के पास स्थित इमामबारगाह नाजिम अली खान से आठ मोहर्रम का पुराना जुलूस उठकर उठकर शेख इलताफ हुसैन पर खत्म होता है, इस जुलूस में शबीह, अलम, दुलदुल व अली असगर का झूला बरामद होता है , इस जुलूस की खास बात यह है कि शहर की सभी अंजुमन इसमें नौहा व मातम करती है और जंजीर का मातम करके खून का पूरशा पेश करते हैं। नौ मोहर्रम को शहर के तमाम इमाबारगाह, चौक और घरों में ताजिया रखा जाता है रात भर लोग मजलिस व मातम करते हैं ,अगले दिन ताजिया 10 मोहर्रम को कर्बला में दफन कर दिया जाता है। इसके बाद 16 जुलाई को पुरानी बाजार में अलम नौचंदी का जुलूस निकलेगा, जिसमें सभी अंजुमनें नौहा व मातम करेंगी।

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