BRICS Summit : अजीत डोभाल बोले- 'होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना स्वागत योग्य कदम, ऊर्जा सुरक्षा में मिलेगी मदद'
नई दिल्ली। ब्रिक्स (BRICS) देशों के अपने समकक्षों का मंगलवार को यहाँ स्वागत करते हुए भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का खुलना एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है, क्योंकि इससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी मदद मिलेगी।
नई दिल्ली इस प्रभावशाली समूह के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर इस सम्मेलन की मेज़बानी कर रही है। डोभाल की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस के एनएसए सर्गेई शोइगु, ईरान के सुरक्षा अधिकारी जी निजामीपुर और ब्रिक्स देशों के अन्य शीर्ष सुरक्षा अधिकारी भाग ले रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए MoU का भारत ने किया स्वागत
ब्रिक्स देशों के एनएसए के सम्मेलन में अपने प्रारंभिक उद्बोधन में डोभाल ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आर्थिक अवरोधों के प्रभाव पर विस्तार से बात की। डोभाल ने कहा, "अमेरिका और ईरान के बीच हुए एमओयू (MoU) का भारत स्वागत करता है। हमें आशा है कि यह काम करेगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा में मदद मिलेगी।" उन्होंने आगे कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना एक बहुत ही स्वागत योग्य घटनाक्रम है। इससे आपूर्ति शृंखलाओं (Supply Chains) की बाधाएं दूर होंगी और उर्वरक व रसायन जैसे क्षेत्रों में कमी की समस्या का समाधान होगा।"
'बहुपक्षवाद कमजोर हो रहा है और साधन अपर्याप्त हैं'
अजीत डोभाल ने अनेक वैश्विक चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "हम बहुत उथल-पुथल भरे समय में मिल रहे हैं। दुनिया भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आर्थिक दबावों और विघटनकारी तकनीक का सामना कर रही है।"
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "न केवल खतरे बढ़ रहे हैं, बल्कि इन संघर्षों को सुलझाने या कम करने के लिए मौजूद साधन और संस्थागत तंत्र भी अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।" उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वर्तमान में "बहुपक्षवाद कमजोर हो रहा है" और विभिन्न वैश्विक चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स की भूमिका अब बेहद अहम हो गई है।
'ग्लोबल साउथ' की आवाज़ को मजबूत करना है मुख्य मकसद
ब्रिक्स की मूल भावना को याद करते हुए एनएसए डोभाल ने कहा, "ब्रिक्स की कल्पना उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के एक अनौपचारिक समूह के तौर पर की गई थी ताकि एक अधिक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ा जा सके। इसका मकसद आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना और 'ग्लोबल साउथ' की आवाज़ को मजबूत करना था।" (नोट: 'ग्लोबल साउथ' से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।)
उन्होंने आगे जोड़ा कि ब्रिक्स ने वैश्विक शासन में सुधार और संस्थागत बेहतरी की भी परिकल्पना की थी। यह देशों का एक बहुत ही खास गठबंधन है जो शांति, प्रगति, विकास और सहयोग में विश्वास रखता है।
दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है 'ब्रिक्स'
बैठक में ब्रिक्स के बढ़ते प्रभाव के आंकड़े भी सामने रखे गए। ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। इसका 2024 में विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हुए, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसका हिस्सा बना। अब यह समूह दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो वैश्विक आबादी के लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी के लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आतंकवाद और गैर-पारंपरिक खतरों पर होगी चर्चा
अजीत डोभाल ने बताया कि इस सम्मेलन में आतंकवाद निरोधक कार्रवाई पर ब्रिक्स के दो संयुक्त कार्यसमूहों के परिणामों पर भी गहन चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने सचेत करते हुए कहा, "हमें नए सुरक्षा खतरों और चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। गैर-पारंपरिक खतरों ने राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर लिया है और पारंपरिक प्रतिक्रियाओं को विफल करने वाली प्रणालियाँ विकसित कर ली हैं।"
