वैश्विक बाजार में बजेगा भारतीय आयुर्वेद का डंका: CSIR-CIMAP ने तैयार किए 22 'निर्देशक द्रव्य', विदेशों में बढ़ेगी हर्बल उत्पादों की साख

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: भारतीय हर्बल और आयुष उत्पादों की विदेशों में स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए सीएसआईआर-सीमैप ने 22 निर्देशक द्रव्य तैयार कर लिए हैं। वैश्विक और वैज्ञानिक मानदंडों के अनुसार इन निर्देशक द्रव्यों को विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत यूरोप, अमेरिका के अन्य संगठन भी स्वीकार करते हैं। इन द्रव्यों से देश के हर्बल व आयुष उत्पाद और न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग की वैश्विक पहचान सुदृढ़ होने के साथ निर्यात भी बढ़ेगा। स्वदेशी प्रमाणित संदर्भ सामग्रियों का औपचारिक विमोचन सीएसआईआर की महानिदेशक और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने निदेशक सीएसआईआर सीमैप डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी की मौजूदगी में किया।

दुनिया भर में बढ़ती नियामक आवश्यकताओं और प्रयोगशालाओं के प्रत्यायन के विस्तार के कारण ऐसी विश्वसनीय संदर्भ सामग्रियों की मांग लगातार बढ़ रही है। साथ ही, वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षेत्रों में गुणवत्ता और सटीक मापन पर बढ़ते जोर के साथ आईएसओ मानक अपनाने वाली प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ने से इन सामग्रियों का महत्व और भी बढ़ गया है। यह विशेष संदर्भ पदार्थ आयुर्वेदिक दवाओं, हर्बल उत्पादों, न्यूट्रास्यूटिकल्स और औषधीय पौधों से बने उत्पादों की गुणवत्ता, शुद्धता और प्रामाणिकता की जांच में मदद करेंगे। अब भारतीय प्रयोगशालाओं और उद्योगों को ऐसे मानकों के लिए विदेशों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में 8 नए भारतीय निर्देशक द्रव्य (इंडियन रेफरेंस मटेरियल) पदार्थ जारी किए गए थे। इससे पहले 5 जनवरी को 14 जारी किए गए थे। इस तरह 22 स्वदेशी सर्टिफाईड रिफरेंस मटेरियल उपलब्ध हो चुके हैं।

क्या होता है निर्देशक द्रव्य

भारतीय आयुर्वेदिक उत्पाद तुलसी की गुणवत्ता, उसके औषधीय उपयोग की स्वीकार्यता भारत में है, लेकिन विदेशी बाजार में इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणिकता की मांग होती है। इस कारण देश के आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात प्रभावित होता है। इसकी जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के हिसाब से संदर्भ सामग्री (रेफरेंस मटेरियल) विदेशों से मंगाना पड़ता था। अब देश में ही वैश्विक मानकों के आधार पर मटेरियल तैयार कर लिया गया है। किंतुअभी भी सैकड़ों की संख्या में प्रमाणित संदर्भ सामग्री की आवश्यकता है। इसके लिए देश के वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं।

भारत ने फार्माकोपिया भी एक बनाया

फार्माकोपिया उस दस्तावेज को कहा जाता है कि जिसमें किसी भी देश की औषधियों की गुणवत्ता, प्रभाव और नए शोध को दर्ज किया जाता है। भारतीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत ने अपना फार्माकोपिया भी एक बनाया है। हालांकि पहले एलोपैथ, होम्योपैथ, आयुर्वेद समेत विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के फार्माकोपिया अलग-अलग होते थे। एक ही उत्पाद की गुणवत्ता और उपयोग भी अलग-अलग दर्ज होते थे, जिससे निर्यात प्रभावित होता था। विदेशों में ज्यादातर एक ही फार्माकोपिया का प्रयोग किया जाता है।

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