Lucknow News : झलकारी बाई अस्पताल में ₹1.90 करोड़ से लगेगा मॉडर्न स्प्रिंकलर सिस्टम
दरख्शां कदीर सिद्दीकी/लखनऊ, अमृत विचार। अस्पतालों में आए दिन होने वाले अग्निकांडों को देखते हुए हजरतगंज स्थित वीरांगना झलकारी बाई महिला अस्पताल को में हाईटेक फायर सेफ्टी सिस्टम लगाया जाएगा। ये अत्याधुनिक स्प्रिंकलर सिस्टम आग लगने पर स्वत: सक्रिय हो जाएगा। इस स्प्रिंकलर सिस्टम प्रोजेक्ट का ठेका आवास विकास एजेंसी को दिया गया है।
झलकारी बाई अस्पताल हजरतगंज में घनी आबादी वाले इलाके में है। यहां यातायात भी अधिक है। अस्पताल परिसर छोटा होने से इसमें दमकल की गाड़ियां बमुश्किल घूम पाती हैं। फायर सेफ्टी के नियमों के मुताबिक, अस्पताल को एक बड़े पानी के टैंक की जरूरत थी, लेकिन सबसे बड़ा तकनीकी पेच यह था कि अस्पताल के ठीक नीचे से मेट्रो की टनल गुजर रही है। ऐसे में जमीन के अंदर गहरा गड्ढा खोदकर वॉटर टैंक बनाना मेट्रो की सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक था।
इस कारण कई वर्ष से अस्पताल में फॉयर सेफ्टी सिस्टम नहीं बन पाया। इस परियोजना के लिए शासन से करीब 1.50 करोड़ रुपये लागत तय की गई थी। आवास विकास ने सुरक्षा मानकों को पूरी तरह पुख्ता करते हुए 1.90 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर अस्पताल को दिया था,जिस अस्पताल प्रशासन ने डायरेक्टर जनरल को भेजा था। निर्माण कार्य का ठेका हो चुका है, अगस्त के अंत तक काम शुरु कर दिया जाएगा।
अब वर्टिकल बनाया जाएगा फॉयर सेफ्टी सिस्टम
जमीन की कमी और भूमिगत निर्माण संभव न होने की वजह से इंजीनियरों ने वर्टिकल इंजीनियरिंग और मॉडर्न साइडवॉल स्प्रिंकलर टेक्नोलॉजी का रास्ता निकाला है। इस तकनीक से बिना जमीन में खुदाई किए अस्पताल की दीवारों और छत के सहारे ऊपर की तरफ मॉडर्न स्प्रिंकलर सिस्टम खड़ा किया जाएगा। पानी के स्टोरेज के लिए अस्पताल की रूफटॉप या वर्टिकल स्पेस का इस्तेमाल कर विशेष ढांचा तैयार किया जाएगा।
कैसे काम करेगी यह हीट-सेंसिटिव तकनीक?
इस अत्याधुनिक तकनीक की प्रमुख विशेषता हेड में लगा हीट-सेंसिटिव ग्लास बल्ब है। अस्पताल के वार्डों और संवेदनशील कमरों में लगने वाले स्प्रिंकलर्स के पास जैसे ही शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य वजह से तापमान बढ़ेगा, यह कांच का बल्ब खुद-ब-खुद फूट जाएगा। बल्ब के फूटते ही वर्टिकल पाइपलाइन से पानी का तेज फव्वारा छूटेगा। यह बारीक बौछारें आग को शुरुआती सेकंड्स में ही दबा देंगी। इससे अस्पताल के महंगे मेडिकल इक्विपमेंट्स को भी पानी से नुकसान नहीं पहुंचेगा।
मौजूदा इंतजामों की सुस्ती से मिलेगी निजात
अभी अस्पताल में अग्नि सुरक्षा मानव आधारित है अस्पताल में लगे अग्नि सुरक्षा सिलिंडर आपात स्थित और रात में उतने कारगर साबित नहीं होते। वर्ष 2016 में इस अस्पताल के एनआईसीयू के पास शॉर्ट सर्किट से आग लग चुकी है। हालांकि प्रशासन ने हाल ही में नया आपात कालीन निकास बनाया है, लेकिन अस्पताल के पास मरीजों और नवजात शिशुओं को आग से बचाने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
क्या बोले अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद
अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मेट्रो रूट और जगह की कमी के कारण जो तकनीकी दिक्कतें थीं उन्हें इस मॉडर्न वर्टिकल सिस्टम के जरिए दूर किया जा रहा है। एस्टीमेट की प्रक्रिया पूरी होते ही काम शुरू करा दिया जाएगा ताकि मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
