लखनऊ अग्निकांड में बुझ गया घर का चिराग, नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक हुआ अम्मार, बेटे का जनाजा उठाकर पिता पर टूटा दुःखों का पहाड़
बाराबंकी, अमृत विचार। लखनऊ के कोचिंग सेंटर संचालित भवन में लगी भीषण आग ने बाराबंकी के एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। नगर कोतवाली क्षेत्र के लखपेड़ाबाग मोहल्ला निवासी 24 वर्षीय मोहम्मद अम्मार की इस दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई। आज गमगीन माहौल में अम्मार को उनके गांव में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। बड़े बेटे का जनाजा उठते देख पिता मंसूर आलम पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
16.jpg)
लखपेड़ाबाग स्थित हनफिया मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद अम्मार पुत्र मंसूर आलम लखनऊ में उसी भवन में ग्राफिक्स डिजाइनर के रूप में कार्यरत थे, जिसमें कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा था। आग लगने के समय वह भवन के अंदर मौजूद थे और गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे की सूचना मिलते ही परिजन बदहवास हालत में लखनऊ के लिए रवाना हुए, लेकिन कुछ ही देर बाद अम्मार की मौत की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
परिजनों और मोहल्ले के लोगों के अनुसार अम्मार बेहद मेहनती, मिलनसार और जिम्मेदार युवा थे। परिवार की आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को वह पूरी निष्ठा से निभा रहे थे। उनकी असमय मौत से न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे मोहल्ले ने अपना एक होनहार बेटा खो दिया।
15.jpg)
मृतक के पिता मंसूर आलम ने नम आंखों से बताया कि अम्मार उनके परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद था। उन्होंने बेटे की शादी तय कर दी थी और अगले वर्ष मार्च में बेटे और बेटी दोनों की शादी करने की तैयारी चल रही थी। बेटे के भविष्य और घर की खुशियों के सपने संजो रहे पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। बेटे का जिक्र करते-करते उनका गला भर आया और शब्द साथ छोड़ गए।
वहीं अम्मार के छोटे भाई उमर ने बताया कि दो दिन की छुट्टी के बाद उनका बड़ा भाई सोमवार को फिर से काम पर गया था। रोजाना दोनों भाइयों की मुलाकात हो जाती थी, लेकिन उस दिन वह सो रहे थे, इसलिए अम्मार से आखिरी बार मुलाकात नहीं हो सकी। यह बात याद करते ही उमर की आंखें छलक उठीं। उन्होंने कहा कि वह बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और उनके बड़े भाई उनकी पढ़ाई से लेकर हर जरूरत में मदद करते थे। भैया मेरे लिए सिर्फ भाई नहीं, पिता समान थे। उनके जाने से मेरी दुनिया उजड़ गई है। उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो पाएगी, यह कहते हुए उमर फफक पड़े।
अम्मार की मौत से लखपेड़ाबाग मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है। जनाजे में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। हर किसी की जुबान पर यही बात थी कि एक मेहनती, जिम्मेदार और उज्ज्वल भविष्य वाले युवक को काल ने समय से पहले छीन लिया। परिवार के सपने, बहन और भाई की उम्मीदें तथा माता-पिता का सहारा एक ही पल में खत्म हो गया, जिससे पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
