आस्था के आगे बेअसर रही तपिश: प्रयागराज में आखिरी बड़े मंगल की धूम, 5.5 क्विंटल फलों से हुआ बजरंगबली का दिव्य श्रृंगार
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ज्येष्ठ माह के अंतिम बड़े मंगल पर आस्था का एक अनोखा रूप देखने को मिला। एक तरफ जहां पूरा शहर भीषण गर्मी और तपिश से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ बजरंगबली के भक्तों का उत्साह इस मौसम पर पूरी तरह भारी पड़ा। भोर होते ही संगम नगरी पूरी तरह से पवनपुत्र की भक्ति में लीन हो गई और शहर के प्रमुख हनुमान मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें नजर आने लगीं।
5.5 क्विंटल फलों से हुआ 'लेटे हनुमान जी' का दिव्य श्रृंगार
इस पावन अवसर पर संगम तट स्थित सुप्रसिद्ध श्री बड़े हनुमान मंदिर (लेटे हनुमान जी) में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। प्रातःकाल मंदिर के महंत बलबीर गिरी ने विधि-विधान से पंच द्रव्य के साथ बजरंगबली का महाअभिषेक और स्नान कराया।
इसके उपरांत भगवान का लगभग 5.5 क्विंटल मौसमी फलों से अत्यंत दिव्य और आकर्षक श्रृंगार किया गया, जो भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। इस विशेष श्रृंगार में डेढ़ क्विंटल आम, ढाई क्विंटल सेब, एक क्विंटल संतरा, एक क्विंटल अनार समेत पचास दर्जन केले सहित कई अन्य प्रकार के फलों का उपयोग किया गया। इसके साथ ही पूरे मंदिर परिसर को सुगंधित देसी और विदेशी फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।
सुंदरकांड के पाठ से आध्यात्मिक हुआ माहौल, लगा 56 भोग
विशेष फल श्रृंगार के उपरांत महंत बलबीर गिरी ने बजरंगबली की महाआरती संपन्न कराई, जिसके बाद कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। हजारों भक्तों ने कतारों में लगकर भगवान के इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन किए। दिनभर मंदिर परिसर में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड के सामूहिक पाठ गूंजते रहे, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और भक्तिमय बना दिया। महाआरती के बाद संकटमोचन हनुमान जी को 56 भोग अर्पित करने की भी विशेष तैयारी की गई।
जगह-जगह भंडारे, गर्मी में शर्बत और प्रसाद ने दी राहत
बड़े मंगल के इस खास मौके पर केवल मंदिरों में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रयागराज शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विशाल भंडारों का आयोजन किया गया। भीषण गर्मी को देखते हुए जगह-जगह राहगीरों और श्रद्धालुओं को पूड़ी-सब्जी, हलवा, बूंदी के साथ-साथ ठंडे और शीतल शर्बत का प्रसाद वितरित किया जा रहा था। कड़ी धूप और उमस के बावजूद भक्तों की आस्था का उत्साह चरम पर रहा और पूरा प्रयागराज 'जय श्रीराम' और 'जय बजरंगबली' के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
