Agra News: आगरा में तालाब की जमीन से हटाए गए अवैध धार्मिक ढांचे, NGT के आदेश पर मस्जिद, मजार और मंदिर पर कार्रवाई

Amrit Vichar Network
Published By Ankit Yadav
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आगरा, अमृत विचार। जिले के जगदीशपुरा क्षेत्र स्थित अंगूठी गांव के पास तालाब की भूमि पर अवैध रूप से निर्मित धार्मिक ढांचों के खिलाफ बुधवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुपालन में मस्जिद, मजार और मंदिर को हटाया गया। इस दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रही, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

तालाब की जमीन पर था अतिक्रमण

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जिस भूमि पर यह कार्रवाई की गई वह राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है। उपजिलाधिकारी (सदर) सचिन राजपूत ने बताया कि करीब पांच हेक्टेयर भूमि तालाब की श्रेणी में आती है। जांच के दौरान पाया गया कि इस भूमि पर मस्जिद, मजार और मंदिर का निर्माण कर अतिक्रमण किया गया था। मामले की शिकायत और सुनवाई के बाद एनजीटी ने संबंधित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश दिए थे।

सभी पक्षों को जारी किया गया था नोटिस

एसडीएम सचिन राजपूत ने बताया कि 10 जून को तहसीलदार (सदर) की अदालत ने सुनवाई के बाद मस्जिद, मजार और मंदिर को अवैध घोषित किया था। इसके बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखने और आवश्यक कार्रवाई करने का अवसर दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत पूरी की गई।

मंदिर पक्ष ने पहले ही हटा ली थीं मूर्तियां

प्रशासन के अनुसार, नोटिस अवधि के दौरान मंदिर से जुड़ी पक्षकारों ने वहां स्थापित मूर्तियों को स्वयं हटा लिया था। इसके बाद प्रशासन ने बुधवार को मौके पर पहुंचकर शेष निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। बुलडोजर और अन्य मशीनों की मदद से मस्जिद, मजार और मंदिर के अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया गया।

शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई कार्रवाई

संवेदनशीलता को देखते हुए इलाके में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों ने पूरे अभियान की निगरानी की और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। प्रशासन का कहना है कि तालाब और अन्य जल स्रोतों की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के संरक्षण से जुड़े नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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