Ayodhya News: राम मंदिर दान राशि मामले की जांच तेज, चंपत राय और ट्रस्ट प्रशासक से SIT की पूछताछ

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Published By Ankit Yadav
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अयोध्या, अमृत विचार। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय गड़बड़ी और राम मंदिर दान राशि में अनियमितताओं के आरोपों की जांच तेज हो गई है। बुधवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से अलग-अलग पूछताछ की। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम ने मंदिर में दान राशि की गणना, रिकॉर्ड प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं पर जानकारी जुटाई।

दान पेटियों और रिकॉर्ड की हुई जांच

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने मंदिर परिसर में मौजूद दान पेटियों का निरीक्षण किया और उनकी संख्या का सत्यापन किया। टीम ने सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ दान से जुड़े विभिन्न दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की। जांच अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उनका परीक्षण शुरू कर दिया है। एसआईटी के सदस्यों में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं। बताया गया कि पूछताछ के दौरान सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों को दूर रखा गया, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी की जा सके।

आभूषण रखने वाले कक्ष का भी निरीक्षण

एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत ने रामलला के गर्भगृह के सामने स्थित उस कक्ष का निरीक्षण किया, जहां श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए आभूषण और अन्य कीमती धातुएं सुरक्षित रखी जाती हैं। इस दौरान उस कक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले ट्रस्ट कर्मचारी कृष्णदेव तिवारी से भी पूछताछ की गई। अधिकारियों के अनुसार, एसआईटी के सदस्य देर शाम तक राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद रहे।

लगभग 40 कर्मचारी करते हैं नकदी की गणना

जांच के दौरान एसआईटी को बताया गया कि ट्रस्ट, भारतीय स्टेट बैंक और संग्रह एजेंसी से जुड़े करीब 40 कर्मचारी दान राशि की नकदी गिनने का काम करते हैं। ये कर्मचारी दो पालियों में कार्य करते हैं और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जाती है।

कई शिकायतें, लेकिन अब तक FIR नहीं

इस मामले में तीन अलग-अलग शिकायतें विभिन्न थानों में दी गई हैं, जिनमें प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। हालांकि, अब तक पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। मंगलवार को धर्म सेना के नेता संतोष दुबे और उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने भी राम जन्मभूमि थाने में शिकायत दी थी।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू ने मामले में एफआईआर दर्ज न होने पर सवाल उठाए। वहीं, समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय ने पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की। उनका कहना है कि चूंकि ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ था, इसलिए जांच भी उसकी निगरानी में होनी चाहिए।

13 जून को गठित हुई थी एसआईटी

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। सरकार का कहना है कि जांच का उद्देश्य तथ्यों का पता लगाना और राम मंदिर की छवि को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच करना है। यह मामला सात जून को उस समय चर्चा में आया था, जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए राम मंदिर की दान राशि में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया था।

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