सीएसआईआर-सीडीआरआर की दवाओं ने दी जिंदगियां

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Published By Anjali Singh
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वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)  के अंतर्गत आने वाला केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआरआई) देश की अग्रणी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में से है, जो औषधि खोज और विकास के क्षेत्र में दशकों से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश की आजादी के तुरंत बाद 1951 में स्थापित इस संस्थान का उद्देश्य देश को दवाओं के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना था। लखनऊ के गोमती नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक छत्तर मंजिल से शुरू हुआ यह संस्थान अब जानकीपुरम एक्सटेंशन के आधुनिक परिसर में कार्यरत है, जहां विरासत और अत्याधुनिक विज्ञान का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां की प्रयोगशाला में रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, औषधि विज्ञान, चिकित्सक और डेटा के वैज्ञानिक मिलकर प्रयोगशाला में विकसित खोजों को सस्ती और प्रभावी दवाओं में बदलते हैं।   -मार्कण्डेय पाण्डेय, लखनऊ

इन क्षेत्रों में कार्य करती है प्रयोगशाला

    औषधि संश्लेषण
    प्री-क्लिनिकल परीक्षण
    क्लिनिकल उपयोग
    प्रजनन स्वास्थ्य
    चयापचय रोग
    संक्रामक रोग
     तंत्रिका विज्ञान
    कैंसर और उपोष्ण उष्णकटिबंधीय रोग

सहेली और छाया का हुआ प्रयोगशाला में जन्म

सीएसआईआर-सीडीआरआई की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है ऑरमेलॉक्सिफीन (सेंटक्रोमैन) जो दुनिया की पहली गैर स्टेरॉयडल मौखिक गर्भनिरोधक गोली है, जिसे इस प्रयोगशाला में स्वदेशी औषधि के तौर पर विकसित किया गया। इसे सहेली नाम से बाजार में उतारा गया, जबकि सरकारी परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत छाया के रूप में वितरित यह दवा लाखों भारतीय महिलाओं को सुरक्षित, सस्ती और हार्मोन-मुक्त गर्भनिरोधक विकल्प उपलब्ध कराती है। सप्ताह में केवल एक बार ली जाने वाली यह गोली पारंपरिक हार्मोनल गोलियों से होने वाले दुष्प्रभावों से बचाती है। इस ऐतिहासिक खोज का श्रेय डॉ. नित्यानंद को दिया जाता है, जिन्होंने भारत में आधुनिक औषधि रसायन विज्ञान की नींव रखी।

1960 के दशक में जब पूरी दुनिया हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियों पर काम कर रही थी, तब एक अलग सवाल उठा कि क्या बिना हार्मोन के गर्भधारण रोका जा सकता है। सीमित फंडिंग, अस्पष्ट नियामक रास्ते के बीच समाधान निकालना चुनौतीपूर्ण था। सैकड़ों यौगिक बनाए गए, अस्वीकार भी हुए और वर्षों तक पशु व मानव परीक्षण चलते रहे। लगातार प्रयासों के बाद सेंटक्रोमैन एक ऐसे अणु के रूप में सामने आया, जो एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स को चयनात्मक रूप से नियंत्रित करता है। यह ओव्यूलेशन या मासिक धर्म को प्रभावित किए बिना गर्भधारण को रोकता है। यही विशेषता इसे सुरक्षित, दीर्घकालिक और सप्ताह में एक बार ली जाने वाली दवा बनाती है। क्लिनिकल परीक्षणों ने इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा को सिद्ध किया और यह प्रयोगशाला की खोज से जन स्वास्थ्य की दवा बन गई। 1990 के दशक की शुरुआत में सहेली को मंजूरी मिली और बाद में इसे राष्ट्रीय परिवार-नियोजन कार्यक्रम में शामिल किया गया। आज भी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में छाया के रूप में यह दवा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।

मलेरिया के खिलाफ लड़ी जंग

सीएसआईआर-सीडीआरआई का योगदान केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। आर्टीईथर, जिसे ई-माल नाम से जाना जाता है, गंभीर और सेरेब्रल मलेरिया के इलाज में उपयोगी एक तेज असर करने वाली दवा है। यह आर्टेमिसिनिन का अर्ध-संश्लेषित रूप है, जिसे विशेष रूप से दवा-प्रतिरोधी मलेरिया के लिए विकसित किया गया। मलेरिया-प्रभावित क्षेत्रों में यह एक प्रभावी और किफायती उपचार विकल्प के रूप में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जा रही है।

डाल्जबोन: जब हर्बल विज्ञान बना सहारा

सीएसआईआर-सीडीआरआई ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ते हुए डाल्जबोन नामक हर्बल बोन-हीलिंग उत्पाद भी विकसित किया। यह प्राकृतिक पौधों से प्राप्त यौगिकों पर आधारित है और हड्डियों की मजबूती व पुनर्निर्माण में सहायक है। यह उत्पाद फार्मांजा हर्बल प्राईवेट लिमिटेड को लाइसेंस किया गया और बाजार में उपलब्ध है।

दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली अन्य खोजें

सीएसआईआर-सीडीआरआई की कई अन्य खोजें जो लोगों के जीवन का हिस्सा हैं

    जॉइंट फ्रेश - ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए पालक-आधारित फॉर्मूलेशन
    बेकोसाइड्स एक्सट्रैक्ट - ब्राह्मी से प्राप्त स्मृतिवर्धक उत्पाद
    कॉन्सैप - गर्भनिरोधक स्पर्मिसाइड क्रीम
    गुग्गुलिपिड - कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण के लिए हर्बल दवा
    सेंटप्रोपाज़ीन, सेंटब्यूटिनडोल, सेंटब्यूक्रिडीन
    सीएसआईआर-सीडीआरआई में विकसित प्रारंभिक स्मॉल-मॉलिक्यूल दवाएं

दुनिया को पहली बार प्रयोगशाला ने दिया

    पहली गैर-स्टेरॉयडल मौखिक गर्भनिरोधक सहेली
    पूरी तरह भारत में खोजी, विकसित और निर्मित दवा
    महिलाओं के लिए एक भरोसेमंद और सशक्त स्वास्थ्य समाधान