बरेली: आवास के लिए ठिठुरते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे लोग, हंगामा

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अमृत विचार, बरेली। कलेक्ट्रेट में लॉटरी के जरिए आवासों का आवंटन होने का संदेश मोबाइल पर आने के बाद सोमवार को बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंच गये। ठिठुरते हुए लोगों की भीड़ को कलेक्ट्रेट में आते देख सुरक्षा कर्मी घबरा गये। महिला-पुरुष ने आवास आवंटन होने का हवाला देते हुए कलेक्ट्रेट आने की बात …

अमृत विचार, बरेली। कलेक्ट्रेट में लॉटरी के जरिए आवासों का आवंटन होने का संदेश मोबाइल पर आने के बाद सोमवार को बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंच गये। ठिठुरते हुए लोगों की भीड़ को कलेक्ट्रेट में आते देख सुरक्षा कर्मी घबरा गये। महिला-पुरुष ने आवास आवंटन होने का हवाला देते हुए कलेक्ट्रेट आने की बात कही।

करीब घंटेभर तक वे परेशान होते रहे। उस वक्त जिलाधिकारी वहां नहीं थे। अपर जिलाधिकारी स्तर के सभी अधिकारी मौजूद थे लेकिन किसी ने लोगों के बीच आकर उनकी दिक्कत समझने की कोशिश नहीं की। चौबाई के अनिल, मिनी बाईपास के इंद्र सक्सेना, राजेंद्र नगर की अनीता गंगवार के अलावा अन्य क्षेत्रों के पंकज पांडेय, कैला देवी, आशा रानी, गुड़िया, मुनीश, विनय भूषण आदि लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया।

कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों ने शांत कराते हुए आवास आवंटित न होने की जानकारी दी। इस पर लोगों को यकीन नहीं हुआ। तब आवास बनाने वाले बिल्डर के प्रोजेक्ट मैनेजर शशांक शर्मा वहां पहुंचे और आवंटन रद होने की जानकारी दी।

मैनेजर ने बताया कि अभी तक आवास आवंटन वाली सूची का सत्यापन नहीं हुआ है। उन्हें कुछ देर पहले यह सूचना मिली है। जिलाधिकारी के निर्देश पर सत्यापन कराने के बाद आवास आवंटन की प्रक्रिया कराई जाएगी। जल्द तारीख तय होगी। उसका संदेश जल्द भेजने की बात कही। तब लोग वापस गए।

बरेली विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर शहर के एक बिल्डर ने नैनीताल रोड पर चार मंजिला और तीन मंजिला तक आवास बनाये हैं। दो कमरों के करीब 500 आवास हैं। बीडीए के सहयोग से 4.50 लाख रुपये में एक आवास गरीब व्यक्ति को उपलब्ध कराया जाएगा। इसे प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़ा गया है।

इसमें आधी रकम आवास बुक कराने वाले को और आधी धनराशि सरकार को देनी है। 480 लोगों ने पांच हजार रुपये देकर आवास बुक कराये हैं। सोमवार को 210 आवासों का लॉटरी के जरिये आवंटन तय था। इसके लिए दो दिन पूर्व से लेकर रविवार तक बिल्डर की ओर से लोगों को संदेश भेजा गया। उसी संदेश को पढ़कर लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।

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