लखनऊ के चर्चित संदीप सिंह हत्याकांड में बड़ा खुलासा! STF के हत्थे चढ़ा ₹1 लाख का इनामी शूटर

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Published By Muskan Dixit
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प्रॉपर्टी डीलर की हत्या के मामले में फरार दूसरा आरोपी गिरफ्तार, रायबरेली रोड पर हुई वारदात के बाद लंबे समय से चल रही थी तलाश

लखनऊ। राजधानी के चर्चित प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह हत्याकांड में उत्तर प्रदेश एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। मामले में फरार चल रहे एक लाख रुपये के इनामी आरोपी सचिन कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्टल, तीन कारतूस, घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और नकदी भी बरामद की गई है।

एसटीएफ के अनुसार, आरोपी सचिन कुमार अंबेडकरनगर जिले के टांडा क्षेत्र स्थित मुबारकपुर गांव का निवासी है। उसे बुधवार रात किसान पथ ओवरब्रिज के नीचे डलौना के पास संयुक्त कार्रवाई में एसटीएफ और पीजीआई पुलिस ने गिरफ्तार किया।

इससे पहले इसी मामले में दूसरे शूटर संजय उर्फ संजीव को 27 जून को लखनऊ में पुलिस मुठभेड़ के दौरान घायल किया गया था, जिसकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उस पर भी ₹1 लाख का इनाम घोषित था।

पूछताछ में कबूला वारदात में अपना रोल

एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक दीपक सिंह के अनुसार, पूछताछ में सचिन कुमार ने स्वीकार किया कि हत्या के समय वह मोटरसाइकिल चला रहा था, जबकि उसका साथी संजय उर्फ संजीव ने प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह पर गोलियां चलाई थीं।

प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया कि हत्या पुरानी रंजिश के चलते कराई गई थी।

ऐसे रची गई थी हत्या की साजिश

जांच के मुताबिक, प्रॉपर्टी डीलिंग से जुड़े दिनेश यादव पर संदीप सिंह को रास्ते से हटाने की साजिश रचने का आरोप है। बताया गया कि दिनेश के ड्राइवर मुकर्रबीन ने उसकी मुलाकात गंगाराम यादव से कराई, जिसके संपर्क में कई शातिर अपराधी थे। गंगाराम ने ही दिनेश की मुलाकात दोनों शूटरों से कराई।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि दिनेश यादव ने हत्या के लिए संजय को एक लाख रुपये एडवांस दिए थे और बाकी रकम बाद में देने का आश्वासन दिया था। वहीं अयोध्या के हिस्ट्रीशीटर दिलीप वर्मा पर हत्या के लिए हथियार उपलब्ध कराने का आरोप है।

वारदात से पहले कई दिनों तक की गई रेकी

एसटीएफ के अनुसार, वारदात से पहले आरोपी कई बार लखनऊ आए और संदीप सिंह के घर, कार्यालय, वाहनों तथा उनके आने-जाने के रास्तों की रेकी की।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने अमीनाबाद से एक सफेद रंग की अपाचे मोटरसाइकिल खरीदी थी, जिसकी नंबर प्लेट पहले ही हटा दी गई थी।

27 मई 2026 को दोनों आरोपी दीनदयाल पार्क के पास से संदीप सिंह की कार का पीछा करते हुए उनके कार्यालय तक पहुंचे। जैसे ही संदीप सिंह कार से उतरे, संजय ने उन पर सीने और सिर में तीन गोलियां दाग दीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

सरेंडर की तैयारी में था आरोपी

पूछताछ में सचिन ने बताया कि घटना के बाद वह अंबेडकरनगर, बस्ती, अयोध्या, आजमगढ़ और मुंबई सहित कई स्थानों पर छिपता रहा।

उसने बताया कि साथी संजय की पुलिस मुठभेड़ में मौत की जानकारी मिलने के बाद वह घबरा गया था और अदालत में आत्मसमर्पण की तैयारी कर रहा था। इसी सिलसिले में वह वकील से मिलने लखनऊ आया था, जहां एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

निशानदेही पर बरामद हुई हत्या में इस्तेमाल पिस्टल

पूछताछ के दौरान सचिन ने हत्या में इस्तेमाल पिस्टल भी बरामद कराई। उसके अनुसार, वारदात के बाद संजय ने पुलिस कार्रवाई के डर से हथियार को पन्नी में लपेटकर देवी सिंह खेड़ा गांव के पास सड़क किनारे गड्ढे में छिपा दिया था। एसटीएफ ने आरोपी की निशानदेही पर हथियार बरामद कर लिया।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पीजीआई थाने में दर्ज हत्या के मुकदमे में आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

क्या था पूरा मामला?

जौनपुर निवासी प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह की 27 मई 2026 को रायबरेली रोड स्थित कल्ली पश्चिम में उनके कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

मामले की जांच के दौरान एसटीएफ ने 31 मई को मुख्य साजिशकर्ता सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 15 जून को शूटरों की व्यवस्था कराने वाले गंगाराम यादव को पकड़ा गया। वहीं मुख्य शूटर संजय उर्फ संजीव 27 जून को पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। अब सचिन कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का कहना है कि इस चर्चित हत्याकांड की साजिश से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हुआ है।

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