Budaun News : खाते में दो महीने से पड़े 34 करोड़, खर्च करने पर लगी पाबंदी
क्षय रोग विभाग में चार माह से नहीं मिला वेतन, अन्य खर्च एक साल से बंद, एनएचएम के खाते में पड़े हैं रुपये, शासन के निर्देश पर ही मिलेगी धनराशि
बदायूं, अमृत विचार। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के खाते दो महीने से 34 करोड़ रुपये का बजट पड़ा है लेकिन उसको खर्च करने पर पाबंदी लगा दी गई है, जिससे जिला क्षय रोग विभाग के कर्मचारियों को चार महीने से वेतन सहित अन्य खर्चों के लिए बार-बार पत्राचार करना पड़ रहा है। क्षय रोगियों को डीबीटी का पैसा एक साल से नहीं मिल पाया है।
स्वास्थ्य विभाग को दो महीने पहले करीब 34 करोड़ का बजट दिया गया था। यह बजट एनएचएम के खाते में पड़े हैं। इसी मद से जिला क्षय रोग विभाग को कुछ धन मिलना था। स्वास्थ्य विभाग के अन्य पटलों को भी पैसा दिया जाना था। लेकिन दो महीने बाद भी किसी को पैसा नहीं दिया गया है। जिला क्षय रोग विभाग के कर्मचारी और डॉक्टरों को चार महीने से वेतन नहीं मिला है। क्षय रोग विभाग द्वारा कई बार सीएमओ को पत्र लिख कर धन आहरित करने की मांग की गई मगर धन नहीं दिया गया। गुरुवार को जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विनेश कुमार ने बताया अब स्थिति बेहद गंभीर है। कई बार पत्र लिखने के बाद भी पैसा नहीं दिया जा रहा है। कार्यालय का खर्च, स्टाफ का वेतन, डीबीटी का पैसा नहीं दिया गया है।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि जिले में इस समय टीबी के करीब 19 हजार मरीज हैं। जिन्हें डीबीटी का पैसा दिया जाना है। मरीज आए दिन अस्पताल में आकर हंगामा करते हैं। खाता चेक कराते हैं। उसमें पैसा नहीं होने पर झगड़े पर आमादा हो जाते हैं। किसी तरह मरीजों को समझाकर शांत करना पड़ रहा है। लेकिन कब तक ऐसा चलेगा। हर दिन परेशानी खड़ी हो रही है।
टीबी के मरीजों की बढ़ रही संख्या
सीएचसी और पीएचसी पर टीबी के मरीजों की जांच के बाद उनकी फाइल तैयार की जाती है। सीएचसी पर जांच के बाद लगातार टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उनकी फाइल तैयार की जा रही है। आभा आईडी से उनका बैंक खाता जोड़ा जा रहा है। क्षेत्रीय आशा बहनें टीबी के मरीजों का डाटा लोड कर रही हैं जो जिला मुख्यालय पर भेजा जा रहा है। टीबी के मरीजों का डाटा लोड होने के बाद मरीजों की संख्या दर्ज की जाती है।
एनएचएम के खाते में 34 करोड़ रुपया पड़ा है। अभी तक दिया नहीं गया है जिससे वेतन भी नहीं मिल पा रहा है। डीबीटी का पैसा एक साल से नहीं दिया गया है। अब स्थिति ठीक नहीं है। सीएमओ को कई बार पत्र लिखा गया फिर भी विभाग को बजट नहीं दिया गया। -डॉ. विनेश कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी।
