राम मंदिर चढ़ावा विवाद : सिक्योरिटी एजेंसी की भूमिका पर भी उठे सवाल, जांच के घेरे में नियुक्ति प्रक्रिया, राजनीतिक कनेक्शन की भी चर्चा
अमृत विचार डेस्क, लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में अब जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। मामले में अब चढ़ावा काउंटिंग और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली सिक्योरिटी एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार एजेंसी वाराणसी से जुड़ी बताई जा रही है और उसके संचालकों के कुछ राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी चर्चा है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के मुताबिक चढ़ावा काउंटिंग के लिए जिन लोगों की नियुक्ति हुई, उनके नाम पहले मंदिर ट्रस्ट की ओर से बैंक को भेजे गए। बैंक की निर्धारित प्रक्रिया के बाद यही नाम सिक्योरिटी एजेंसी तक पहुंचे, जहां संबंधित लोगों को पेरोल पर रखा गया। ऐसे में काउंटिंग रूम, सुरक्षा व्यवस्था और मैनपावर की पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
जांच के दायरे में नियुक्ति प्रक्रिया
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि काउंटिंग में शामिल कर्मचारी ट्रस्ट की अनुशंसा, बैंक की प्रक्रिया और सिक्योरिटी एजेंसी के माध्यम से नियुक्त हुए थे, तो चोरी की जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखना पर्याप्त होगा या नहीं, इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इसी बीच यह मांग भी उठ रही है कि सिक्योरिटी एजेंसी के चयन, कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की जाए। साथ ही एजेंसी और उससे जुड़े संभावित राजनीतिक संबंधों की भी निष्पक्ष पड़ताल हो।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में ट्रस्ट, बैंक, सिक्योरिटी एजेंसी या किसी राजनीतिक व्यक्ति की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियों ने भी अभी तक किसी बड़े नेटवर्क या कथित सिंडिकेट की पुष्टि नहीं की है।
