यूपी में बिजली दरों पर सस्पेंस खत्म, जानें क्या इस बार महंगी होगी बिजली?
उपभोक्ता परिषद बोली- बनेगा नया रिकॉर्ड, बिजली कंपनियों की साजिश होगी बेनकाब
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में वर्ष-26-27 की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) और नई बिजली दरों को लेकर सभी जनसुनवाई और राज्य सलाहकार समिति की बैठकें पूरी हो चुकी हैं। अब प्रदेश विद्युत नियामक आयोग किसी भी समय नई बिजली दरों की घोषणा कर सकता है। ऐसे में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद को उम्मीद है कि इस बार बिजली दर निर्धारण में नया रिकॉर्ड बनेगा और बिजली कंपनियों की साजिश बेनकाब होगी।
51 हजार करोड़ अधिक का सरप्लस
परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनियों पर प्रदेश के उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस है। इसी मुद्दे की प्रभावी पैरवी के चलते पिछले छह वर्षों से प्रदेश में बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस बार नोएडा पावर कंपनी के मामले पर परिषद विशेष नजर बनाए हुए है, जिससे वहां उपभोक्ताओं को मिलने वाला 10 प्रतिशत बिजली दर रिबेट समाप्त न किया जा सके।
राजस्व घाटा दिखाकर बिजली दरें बढ़ाने की मांग
परिषद अध्यक्ष के अनुसार, बिजली कंपनियों ने वर्ष-24-25 के ट्रू-अप में 3,995 करोड़ रुपये और वर्ष-26-27 के लिए 12,453 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा दिखाकर कुल 16,448 करोड़ रुपये के आधार पर बिजली दरें बढ़ाने की मांग की है। परिषद ने तथ्यों और आंकड़ों के साथ इसका विरोध किया है।
उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
वहीं, स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग योजना पर प्रस्तावित 3,838 करोड़ रुपये का खर्च उपभोक्ताओं के बिलों में जोड़ने के प्रयास पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई है। परिषद को भरोसा है कि आयोग उपभोक्ता हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संतुलित और न्याय संगत फैसला देगा।
