प्रीमैच्योर शिशुओं के जीवन में शुरुआती घंटे सबसे अहम: FOGSI कांफ्रेंस में विशेषज्ञों ने बताए बचाव के तरीके
लखनऊ, अमृत विचार : समय से पहले जन्म लेने वाले (प्रीमैच्योर) शिशुओं के जीवन को बचाने में शुरुआती घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे शिशुओं के अंग पूरी तरह विकसित न होने के कारण उन्हें सांस लेने में कठिनाई, शरीर का तापमान बनाए रखने में समस्या तथा संक्रमण और पोषण संबंधी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह जानकारी वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. प्रीति कुमार ने दी।
शनिवार को होटल क्लार्क अवध में फेडरेशन ऑफ आब्स्टेट्रिक एंड गायनोकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि प्रीमैच्योर नवजातों में सबसे बड़ी चुनौती फेफड़ों का पूर्ण रूप से विकसित न होना होती है। ऐसे मामलों में ऑक्सीजन सपोर्ट, वेंटिलेशन और सीपीएपी जैसी आधुनिक तकनीकों की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि संक्रमण से बचाव के लिए निरंतर निगरानी, समय पर एंटीबायोटिक का उपयोग और स्वच्छता का विशेष ध्यान आवश्यक है।
विशेषज्ञ डॉ. सीमा मेहरोत्रा ने बताया कि कम वजन वाले शिशुओं के लिए उचित पोषण उपचार का अहम हिस्सा है। मां का दूध और कंगारू मदर केयर जैसी विधियां नवजात के वजन बढ़ाने, शरीर का तापमान नियंत्रित रखने और संक्रमण के खतरे को कम करने में अत्यंत प्रभावी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रीमैच्योर शिशुओं को अस्पताल से डिस्चार्ज करने से पहले उनकी सांस लेने की क्षमता, वजन और फीडिंग की स्थिति का पूर्ण मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि घर पर उनकी देखभाल सुरक्षित और प्रभावी तरीके से की जा सके।
समय से पहले जन्म के कारण
-मां में हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह या संक्रमण
-गर्भ में बच्चे की वृद्धि कम होना
-जुड़वा या एक से अधिक बच्चों का गर्भ
-गर्भाशय या सर्विक्स से जुड़ी समस्या
-धूम्रपान, तनाव या पोषण की कमी
बचाव
-गर्भावस्था में नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह
-संतुलित आहार और पर्याप्त आराम
-संक्रमण या किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत इलाज
-हाई रिस्क गर्भावस्था की समय पर पहचान
-डॉक्टर की सलाह से जरूरी दवाएं और निगरानी
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