अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले गोंडा में उठी मांग, महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली कोंडर को मिले 'राष्ट्रीय योग तीर्थ' का दर्जा
- पतंजलि जन्मभूमि कोंडर में अंतरराष्ट्रीय योग विश्वविद्यालय स्थापना की मांग
गोंडा, अमृत विचार: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के अवसर पर महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली पंतजलिपुरी कोंडर को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय योग तीर्थ के रूप में विकसित करने की मांग तेज हो गई है। सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में सनातन धर्म परिषद एवं श्री पतंजलि जन्मभूमि न्यास के पदाधिकारियों ने केंद्र व प्रदेश सरकार से महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि के समग्र विकास के लिए विशेष पहल करने की अपील की।
प्रेस वार्ता में डा स्वामी भगवताचार्य ने कहा कि योग, आयुर्वेद और संस्कृत व्याकरण के महान आचार्य महर्षि पतंजलि ने मानवता को अमूल्य ज्ञान दिया। उनके योग दर्शन ने पूरी दुनिया को स्वस्थ जीवन और आत्मिक उन्नति का मार्ग दिखाया है। ऐसे में उनकी जन्मस्थली को वैश्विक पहचान दिलाने तथा योग, शोध और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की आवश्यकता है।
महर्षि पतंजलि अंतरराष्ट्रीय योग विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग
न्यास के पदाधिकारियों ने मांग की कि कोंडर में महर्षि पतंजलि अंतरराष्ट्रीय योग विश्वविद्यालय की स्थापना की जाए। साथ ही यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिल्ली से गोंडा होते हुए ‘पतंजलि एक्सप्रेस’ ट्रेन संचालित की जाए। उन्होंने महर्षि पतंजलि जन्मभूमि कोंडर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थल तथा राष्ट्रीय योग तीर्थ के रूप में विकसित करने की मांग भी उठाई।
उन्होने बताया कि प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग के सहयोग से यहां आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज की स्थापना के प्रयास जारी हैं तथा भवन निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर के योग एवं शोध केंद्र, महर्षि पतंजलि के जीवन और कृतित्व पर आधारित संग्रहालय तथा अध्ययन केंद्र की स्थापना की भी मांग की गई।
वक्ताओं ने कहा कि महर्षि पतंजलि केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा धरोहर हैं। उनकी जन्मभूमि का संरक्षण और विकास देश की सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों से इस अभियान में सहयोग करने का आह्वान किया।
