आयुष्मान लाभार्थियों को बड़ी राहत : अब जिले में ही सुलझेंगी कार्ड की समस्याएं, CMO और जिला आयुष्मान टीमों को मिले विशेष अधिकार

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड डिसेबल कराने के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे लखनऊ के चक्कर

लखनऊ, अमृत विचार: मुख्यमंत्री के निर्देश पर आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों को बड़ी राहत मिली है। अब आयुष्मान कार्ड के अप्रूवल, रिजेक्शन और डिसेबल जैसी समस्याओं के समाधान के लिए लाभार्थियों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) के लखनऊ स्थित कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इन मामलों का निस्तारण अब जिला स्तर पर ही किया जाएगा।

साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ), नोडल आयुष्मान अधिकारियों और जिला कार्यान्वयन इकाइयों को विशेष तकनीकी आईडी उपलब्ध करा दी गई है। इसके माध्यम से अधिकारी लाभार्थियों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर त्वरित समाधान कर सकेंगे। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी तथा सेवाएं अधिक सुलभ बनेंगी।

राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन

साचीज के अनुसार प्रदेश में क्लेम निस्तारण और भुगतान का औसत टर्न-अराउंड टाइम 57 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 73 दिन है। वर्तमान में करीब 500 करोड़ रुपये की देनदारी लंबित है, जिसके निस्तारण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और अस्पतालों को समयबद्ध भुगतान उपलब्ध कराना है।

अस्पतालों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

कई बार आवश्यक दस्तावेज समय पर प्रस्तुत न होने के कारण दावे अस्वीकृत हो जाते हैं। इसे देखते हुए साचीज अस्पतालों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रही है। इसमें दावा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया, आवश्यक अभिलेखों और स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस की जानकारी दी जा रही है।

200 अस्पताल डी-एम्पैनल, 300 की जांच जारी

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी भी की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अनियमितताओं और गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन पर लगभग 200 अस्पतालों को योजना से डी-एम्पैनल किया गया है। वहीं करीब 300 अस्पतालों को अपकोडिंग और संदिग्ध दावों के जरिए अनुचित भुगतान प्राप्त करने के संदेह में चिन्हित किया गया है। इन अस्पतालों को नोटिस जारी कर विस्तृत फील्ड ऑडिट कराया जा रहा है। अनियमितता साबित होने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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