अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद: 'टिन्नू' के अचानक सामने आने से गहराया रहस्य, SIT जांच में CCTV फुटेज से छेड़छाड़ की आशंका, देखें Video
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में वित्तीय हेरफेर (गबन) का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का अचानक सामने आना और मीडिया में बयान जारी करना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि टिन्नू का यह कदम किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, ताकि ट्रस्ट के कुछ बड़े पदाधिकारियों को बचाया जा सके।
10 दिनों की खामोशी के बाद अचानक एंट्री
बीती 6 जून को जब चंदे में हेरफेर का मामला पहली बार सामने आया, तो हड़कंप मच गया था। इसके बाद से ही राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों ने पूरी तरह चुप्पी साध ली थी। यहाँ तक कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने भी कारसेवकपुरम छोड़कर मंदिर परिसर स्थित कार्यालय को ही अपना ठिकाना बना लिया और मीडिया से दूरी बना ली।
ऐसे माहौल में करीब 10 दिन बाद सोमवार को टिन्नू यादव ने अचानक एक वीडियो बयान जारी किया और कई मीडिया घरानों को इंटरव्यू दिए। अपने बयानों में टिन्नू ने चंपत राय का बचाव किया है, जबकि अन्य लोगों पर उंगली उठाई है, जिससे इस विवाद में किसी 'बड़े खेल' की आशंका बढ़ गई है।
राजनैतिक उकसावे और रणनीति की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले के कानूनी रूप लेने से पहले एक राजनीतिक दल के कुछ पदाधिकारियों ने टिन्नू से संपर्क किया था। उन्हें सचेत किया गया था कि अगर वह चुप रहे, तो पूरा ठीकरा उन पर फोड़ा जा सकता है। इसके बाद ट्रस्ट के ही एक करीबी पदाधिकारी की सहमति से टिन्नू को आगे किया गया ताकि वह अपना पक्ष रख सकें।
ये 4 किरदार सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में
जांच एजेंसियों और सूत्रों के अनुसार, दान राशि के प्रबंधन और मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े ये चार लोग इस समय सबसे बड़े निशाने पर हैं। इसमें राम मंदिर ट्रस्ट महासचिव, चंपत राय, चर्चा है कि ट्रस्टी अनिल मिश्रा वह इस समय केरल में हैं। उनके अयोध्या से बाहर जाने के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मंदिर निर्माण सहायक गोपाल राव पर भी सवाल उठ रहे हैं कि पद छोटा होने के बावजूद महत्वपूर्ण कार्यों में इनका सीधा हस्तक्षेप माना जाता है। साथ ही संबंधित कर्मी टिन्नू यादव
SIT की तफ्तीश तेज
विशेष जांच दल (SIT) की टीम सोमवार से ही अयोध्या में डेरा डाले हुए है। पहले दिन 7.5 घंटे और दूसरे दिन 11 घंटे की मैराथन जांच के बाद बुधवार को तीसरे दिन भी पूछताछ का सिलसिला जारी रहा।
SIT की जांच के मुख्य बिंदु
जांच टीम को कुछ ऐसे तकनीकी सुबूत मिले हैं, जिससे अंदेशा है कि चोरी की वारदात को छुपाने के लिए सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई थी।
दान राशि की गिनती हमेशा बैंक कर्मियों की मौजूदगी में होती थी। एसआईटी की जांच में बैंक की लापरवाही भी सामने आई है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि बैंक कर्मी ट्रस्ट के रसूखदार पदाधिकारियों के दबाव में काम करते थे।
चंपत राय और गोपाल राव समेत कई जिम्मेदारों से जब तीखे सवाल किए गए, तो वे स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। एसआईटी ने पूछताछ के लिए 200 लोगों की सूची बनाई है, जिनमें से 125 से पूछताछ पूरी हो चुकी है।
हिरासत में लिए गए 5 संदिग्धों ने कई बड़े नामों का खुलासा किया है और उनसे कुछ रकम भी बरामद हुई है। अब देखना यह है कि एसआईटी अपनी जांच पूरी होने के बाद एफआईआर (FIR) दर्ज करती है या उससे पहले।
पूछताछ में टिन्नू ने खुद को बताया बेकसूर
तीसरे दिन एसआईटी ने टिन्नू यादव से बेहद कड़े सवाल किए। टिन्नू ने गबन के आरोपों से साफ इनकार करते हुए कहा कि उसका काम सिर्फ मंदिर की व्यवस्थाएं देखना था, न कि पैसों की गिनती करना। इस दौरान टिन्नू ने ट्रस्टी अनिल मिश्रा और तीन काउंटिंग प्रभारियों का नाम लेते हुए पूरी जिम्मेदारी उन पर डाल दी।
सीएम योगी का अयोध्या दौरा कल
इस पूरे विवाद और एसआईटी जांच के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 19 जून को अयोध्या के दौरे पर आ रहे हैं। वह मणिराम दास छावनी में महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इस संवेदनशील समय में उनके इस दौरे को काफी अहम माना जा रहा है।
