राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में बड़ा खुलासा : दान के चांदी के हार और चरण पादुका का नहीं मिला रिकॉर्ड, जानिए क्या बोले नृपेंद्र मिश्र?

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Published By Deepak Mishra
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राम मंदिर में चढ़ावे के साथ वित्तीय अनियमितताओं की जांच में दान में मिले बहुमूल्य जेवरातों में हेरफेर करने का मामला भी सामने आया है। टीम ने उन श्रद्धालुओं और दानदाताओं से भी संपर्क किया है, जिन्होंने रामलला के लिए बहुमूल्य आभूषण और अन्य सामग्री भेंट की थी।

अयोध्या, अमृत विचार : राम मंदिर में चढ़ावे के साथ वित्तीय अनियमितताओं की जांच में दान में मिले बहुमूल्य जेवरातों में हेरफेर करने का मामला भी सामने आया है। टीम ने उन श्रद्धालुओं और दानदाताओं से भी संपर्क किया है, जिन्होंने रामलला के लिए बहुमूल्य आभूषण और अन्य सामग्री भेंट की थी।

जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना रहा कि दान की गई वस्तुएं किसे सौंपी गईं, उनका रिकॉर्ड कैसे रखा गया और क्या दानदाताओं को कोई आधिकारिक रसीद प्रदान की गई थी। जानकारी के मुताबिक मुंबई के कारोबारी व जौनपुर जिले के निवासी अनिल विश्वकर्मा ने भी एसआईटी को अपना बयान दर्ज कराया है।

रामकोट स्थित रोकड़िया हनुमान मंदिर के महंत आचार्य विनोद मिश्रा ने बताया कि अनिल ने लगभग तीन किलोग्राम चांदी का हार जिस पर 12 शिवलिंग बने थे व करीब एक किलोग्राम वजनी चांदी की चरण पादुका अर्पित की थी। जानकारी के अनुसार अनिल ने इसे ट्रस्ट को सौंपते समय यह मांग की थी कि इसे एक बार भगवान को अर्पित कर उसकी फोटो उन्हें दे दी जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनका कहना है कि उन्हें इसकी कोई अधिकारिक रसीद भी नहीं दी गई।

आचार्य विनोद का कहना है कि अनिल विश्वकर्मा उनके शिष्य हैं, दान करने के लिए जब मुझसे संपर्क किया तो मैंने अपने पूर्व परिचित रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को इसकी जानकारी दी। अक्टूबर 2025 वह में दान अर्पित करने के लिए अयोध्या आए। टिन्नू ने उन्हें विशेष मार्ग से गर्भगृह तक पहुंचाया।

हालांकि परिवार को बाद में भी कोई रसीद या आधिकारिक सूचना नहीं मिली। जब कई माह तक उन्हें भगवान के समक्ष उनके दान की फोटो नहीं मिली तो उन्होंने टिन्नू से इसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसे गलाकर अन्य उपयोग के लिए सुरक्षित कर लिया गया है। इसी तरह हीरे जड़ित हार व पादुकायें, चांदी की पादुकाएं समेत दान में मिले काफी जेवरात का रिकॉर्ड न मिलने की भी चर्चा है।

ट्रस्ट कार्यालय पर पसरा सन्नाटा

एसआईटी जांच में मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कार्यालय के रिकॉर्ड को भी खंगाला गया। इसके चलते जिन कार्यालय पर सुबह से मिलने वालों की भीड़ लगी रहती थी, आज वहां पर सन्नाटा पसरा हुआ है। सिर्फ कार्य करने वाले कर्मचारी ही कार्यालय में पहुंच रहे है।

अनुभवी हाथों में हो ट्रस्ट की कमान : नृपेंद्र मिश्र

एक निजी चैनल से बात करते हुए राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। कहा कि वर्तमान में मंदिर परिसर में 1500 से ज्यादा कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। वह स्वयंसेवक हैं। इनको अलग-अलग कार्य में लगाया गया है। इसके लिए न ही कोई लिखित नियम बनाया गया है व न ही कार्य कर रहे स्वयंसेवकों को कार्य वितरण को कोई लिखित आदेश दिया गया है। इसके चलते उनकी कोई जवाबदेही भी नहीं है। कहा कि वह ट्रस्ट को भंग करने व इसे सरकारी तंत्र के हाथ में सौंपने की बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन मंदिर संबंधित कार्य के लिए एक लिखित नियम बनाना चाहिए। इसका संचालन अनुभवी लोगों के हाथ में होना चाहिए।

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