कृषि को तकनीक से जोड़ती ‘ड्रोन दीदी’
जब हौसलों की उड़ान ऊंची हो, तो आसमान की दूरियां भी छोटी पड़ जाती हैं। बरेली में नवाबगंज क्षेत्र की रहने वाली किरन गंगवार ने इसे सच कर दिखाया है, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ की ताकत को पहचानकर आमतौर पर पुरुषों के वर्चस्व वाले इस तकनीकी क्षेत्र में वह आज मिसाल बन चुकी है। इफको से ट्रेनिंग लेकर रिमोट कंट्रोल हाथ में थामकर आसमान में कृषि ड्रोन उड़ाती किरन ने अपनी इस अनूठी कामयाबी से पूरे जिले का नाम रोशन किया है।
एमए की पढ़ाई कर चुकी किरन ने शुरुआती दौर में जब गांव की पगडंडियों और खेतों के ऊपर रिमोट थामकर ड्रोन उड़ाया, तो ग्रामीणों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं था। लोगों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि पुरुषों की ओर से घंटों की हाड़तोड़ मेहनत से किए जाने वाले इस काम को एक लड़की हवा में मशीन उड़ाकर पल भर में कर देगी।
किरन बताती हैं कि उनके पिता प्रेमपाल गंगवार के अटूट सहयोग और खुद के दृढ़ संकल्प से इस अविश्वास को विश्वास में बदल दिया। आज स्थिति यह है कि नवाबगंज और आस-पास के इलाकों के पुरुष किसान भी फसलों पर कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव के लिए पारंपरिक तरीकों को छोड़ किरन के पास ऑर्डर्स की लंबी कतार लगाए खड़े हैं। प्रति एकड़ 300 से 350 रुपये शुल्क लेकर किरन अब तक 500 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर सफलतापूर्वक स्प्रे कर चुकी हैं। इससे दो लाख रुपये से अधिक की आमदनी हुई।
कम समय और कम लागत में खेती की नई तकनीक
पारंपरिक रूप से पीठ पर भारी टैंक लादकर खेतों में कीटनाशक छिड़काव करना पुरुषों के लिए भी बेहद थकाऊ और स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक काम रहा है, लेकिन 'नमो ड्रोन दीदी योजना' के कृषि ड्रोन ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। ड्रोन के जरिए महज कुछ ही मिनटों में पूरे एक एकड़ खेत में एक समान रूप से छिड़काव हो जाता है। इससे न सिर्फ कीटनाशकों और पानी की बर्बादी रुकती है, बल्कि समय और मजदूरी की लागत आधी होने से किसानों का मुनाफा भी बढ़ रहा है।
एक अनजान कॉल से बदल गई किस्मत
नवाबगंज की किरन के पास नवंबर 2023 में एक अनजान नंबर से फोन आया। उन्हें बताया गया कि एफपीओ से जुड़े होने के कारण उन्हें कृषि क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए इफको की तरफ से मुफ्त ड्रोन और ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद उन्होंने लिखित परीक्षा पास की और दिसंबर 2023 में प्रयागराज के फूलपुर स्थित इफको कोरडेट में ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण लिया। मार्च 2024 में 'नमो ड्रोन दीदी योजना' के तहत उन्हें कृषि ड्रोन मिला और उनके इस शानदार सफर की शुरुआत हुई।
ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बना 'नमो ड्रोन' अभियान
प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी 'नमो ड्रोन दीदी योजना' ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण की एक नई क्रांति बनकर उभरी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कृषि क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक से जोड़कर आर्थिक रूप से समृद्ध बनाना है। किरन की इस शानदार सफलता को देखकर क्षेत्र की अन्य ग्रामीण युवतियां और महिलाएं भी अब इस प्रशिक्षण को लेने के लिए प्रेरित हो रही हैं, जिससे आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ढांचा पूरी तरह बदलने वाला है।
'नारी खुद को कमजोर न समझे'
बरेली की पहली 'ड्रोन दीदी' किरन गंगवार का कहना है कि रूढ़ियों को तोड़ना और पुरुषों के वर्चस्व वाले तकनीकी क्षेत्र में कदम रखना शुरुआत में आसान नहीं था। लेकिन, अगर महिलाओं को परिवार का मजबूत साथ, सही दिशा और आधुनिक तकनीकी ट्रेनिंग मिल जाए, तो कुछ भी असंभव नहीं है। वे कहती हैं आज की नारी को खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए। वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आत्मनिर्भर बन सकती हैं और समाज के लिए प्रेरणा की नई मिसाल खड़ी कर सकती हैं।
महिपाल गंगवार
